अब हैं पशेमाँ तुम से ज़ियादा!

अहद-ए-वफ़ा यारों से निभाएँ नाज़-ए-हरीफ़ाँ हँस के उठाएँ,
जब हमें अरमाँ तुमसे सिवा था अब हैं पशेमाँ तुम से ज़ियादा|

मजरूह सुल्तानपुरी

हवा दिल में ख़्वाहिश जगाने लगी!

बदन पर नई फ़स्ल आने लगी,
हवा दिल में ख़्वाहिश जगाने लगी|

आदिल मंसूरी

आरज़ू ही सही!

नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही,
नहीं विसाल मयस्सर तो आरज़ू ही सही|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ख़ुद ज़हर-ए-तमन्ना की तरफ़!

हम भी अमृत के तलबगार रहे हैं लेकिन,
हाथ बढ़ जाते हैं ख़ुद ज़हर-ए-तमन्ना की तरफ़|

राही मासूम रज़ा

जिसकी कभी ख़्वाहिश नहीं की!

जिस क़दर उससे त’अल्लुक़ था चला जाता है,
उसका क्या रंज हो जिसकी कभी ख़्वाहिश नहीं की|

अहमद फ़राज़

चला हूँ किसी रौशनी के साथ!

तेरा ख़याल, तेरी तलब तेरी आरज़ू,
मैं उम्र भर चला हूँ किसी रौशनी के साथ|

वसीम बरेलवी

अरमान को रुस्वा कौन करे!

जब दिल में ज़रा भी आस न हो इज़्हार-ए-तमन्ना कौन करे,
अरमान किए दिल ही में फ़ना अरमान को रुस्वा कौन करे|

आनंद नारायण मुल्ला

ज़िद्दी हैं परिंदे कि उड़ा भी न सकूँ!

अजनबी ख़्वाहिशें सीने में दबा भी न सकूँ,
ऐसे ज़िद्दी हैं परिंदे कि उड़ा भी न सकूँ|

राहत इन्दौरी

मुझको रंज सहना आ गया!

आरज़ू को दिल ही दिल में घुट के रहना आ गया,
और वो ये समझे कि मुझको रंज सहना आ गया|

आनंद नारायण मुल्ला

ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं!

इंसाँ की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं,
दो गज़ ज़मीं भी चाहिए दो गज़ कफ़न के बा’द|

कैफ़ी आज़मी