दूसरा कोई रास्ता ही नहीं!

ज़िन्दगी! मौत तेरी मंज़िल है
दूसरा कोई रास्ता ही नहीं।

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

सोचों में पड़े हुए हैं!

जा पहुँचा मंज़िल पे ज़माना,
हम सोचों में पड़े हुए हैं|

राजेश रेड्डी