कल जाने क्या से क्या हो जाएं!

तू भी हीरे से बन गया पत्थर,
हम भी कल जाने क्या से क्या हो जाएं|

अहमद फराज़

मुट्ठी में वो रतन देखा!

ख़रीदने को जिसे कम थी दौलत-ए-दुनिया,
किसी कबीर की मुट्ठी में वो रतन देखा|

नीरज