बहुत दिन किसी के साथ!

दुनिया को बेवफ़ाई का इल्ज़ाम कौन दे,
अपनी ही निभ सकी न बहुत दिन किसी के साथ|

वसीम बरेलवी

ज़रा सी बेवफ़ाई तो ज़रूरी है!

मोहब्बत में ज़रा सी बेवफ़ाई तो ज़रूरी है,
वही अच्छा भी लगता है जो वा’दे तोड़ देता है|

वसीम बरेलवी

बे-सबब तेरी सरगिरानी है!

हम तो ख़ुश हैं तिरी जफ़ा पर भी,
बे-सबब तेरी सरगिरानी है|

फ़िराक़ गोरखपुरी

तुम को ख़बर होते तक!

हमने माना कि तग़ाफ़ुल न करोगे लेकिन,
ख़ाक हो जाएँगे हम तुम को ख़बर होते तक|

मिर्ज़ा ग़ालिब

बनते हैं अंजाने बहुत!

क्या तग़ाफ़ुल का अजब अन्दाज़ है,
जानकर बनते हैं अंजाने बहुत|

महेन्द्र सिंह बेदी ‘सहर’