बीमारी पुरानी और है!

चारागर रोते हैं ताज़ा ज़ख्म को,
दिल की बीमारी पुरानी और है|

अहमद फ़राज़

कू-ए-सितमगर के हो गये!

अब के ना इंतेज़ार करें चारागर का हम,
अब के गये तो कू-ए-सितमगर के हो गये|

अहमद फ़राज़

आप ही समझाता है !

दिल को नासेह की ज़रूरत है न चारागर की,
आप ही रोता है औ आप ही समझाता है ।

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

कहीं जाँ से भी न जाओ!

इन्हीं ख़ुशगुमानियों में कहीं जां से भी न जाओ,
वो जो चारागर नहीं है उसे ज़ख़्म क्यूं दिखाओ|

अहमद फ़राज़