ख़्वाब में दरिया दिखाई दे!

उस तिश्ना-लब के नींद न टूटे दुआ करो,
जिस तिश्ना-लब को ख़्वाब में दरिया दिखाई दे|

कृष्ण बिहारी नूर

ख़्वाब देख डालो, इंक़िलाब लाओ!

ये चराग़ जैसे लम्हे कहीं राएगाँ न जाएँ,
कोई ख़्वाब देख डालो कोई इंक़िलाब लाओ|

राही मासूम रज़ा

जहाँ में बिखर जाएँ हम तो क्या!

हस्ती ही अपनी क्या है ज़माने के सामने,
इक ख़्वाब हैं जहाँ में बिखर जाएँ हम तो क्या|

मुनीर नियाज़ी

नींद उड़ा देनी चाहिए!

मैं ख़्वाब हूँ तो ख़्वाब से चौंकाइए मुझे,
मैं नींद हूँ तो नींद उड़ा देनी चाहिए|

राहत इंदौरी

ख़्वाबों से आँखें नहीं फोड़ा करते!

जागने पर भी नहीं आँख से गिरतीं किर्चें,
इस तरह ख़्वाबों से आँखें नहीं फोड़ा करते|

गुलज़ार

मिट गया ख़्वाब आँख मलते ही!

कौन था तू कि फिर न देखा तुझे,
मिट गया ख़्वाब आँख मलते ही|

मुनीर नियाज़ी

शबनम फूल के प्यालों में!

यूँ किसी की आँखों में सुब्ह तक अभी थे हम,
जिस तरह रहे शबनम फूल के प्यालों में|

बशीर बद्र

ताबीर करके देखते हैं!

कहानियाँ ही सही सब मुबालग़े ही सही,
अगर वो ख़्वाब है ताबीर करके देखते हैं|

अहमद फ़राज़

नींद टूटी तो फिर नहीं आई!

नींद टूटी तो फिर नहीं आई,
क्या बताएँ कि ख़्वाब क्या देखा !

नक़्श लायलपुरी

ये जो ज़िन्दगी की किताब है!

ये जो ज़िन्दगी की किताब है, ये किताब भी क्या किताब है|
कहीं इक हसीन सा ख़्वाब है कहीं जान-लेवा अज़ाब* है|

वेदना*

राजेश रेड्डी