ज़ेर-ए-आब मत देखा करो!

स तमाशे में उलट जाती हैं अक्सर कश्तियाँ,
डूबने वालों को ज़ेर-ए-आब मत देखा करो|

अहमद फ़राज़

मिरा इम्तिहान क्या लेगा!

मैं इस उमीद पे डूबा कि तू बचा लेगा,
अब इसके बा’द मिरा इम्तिहान क्या लेगा|

वसीम बरेलवी

मुझे कौन उभरने देगा!

डूब जाने को, जो तक़दीर समझ बैठे हों,
ऐसे लोगों में मुझे कौन उभरने देगा|

वसीम बरेलवी

मैं जो डूबा, उभर गया कोई!

इश़्क भी क्या अजीब दरिया है,
मैं जो डूबा, उभर गया कोई|

सूर्यभानु गुप्त

मुझे डूब के मर जाने दे!

अपनी आँखों के समंदर मैं उतर जाने दे,
तेरा मुजरिम हूँ मुझे डूब के मर जाने दे|


नज़ीर बाक़री