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स्कॉटलैंड में दूसरा दिन!

तीन दिन की स्कॉटलैंड यात्रा में दूसरे दिन के बारे में बात करने से पूर्व यह बता दूं कि यात्रा के दौरान पहली रात हमने ग्लास्गो एयरपोर्ट के पास ही ‘ट्रैवेलॉज’ समूह के होटल में बिताई, जहाँ टूर ऑपरेटर ने हमारे रुकने की व्यवस्था की थी। इस होटल में कांटिनेंटल ब्रेकफास्ट की व्यवस्था थी, जिसमें मुझ जैसे लोगों को बार-बार यह पूछना पड़ता है, ‘ये डिश वेजीटेरिअन है न जी!’


खैर नाश्ता करके हम सुबह 9 बजे भ्रमण के लिए रवाना हुए। चलिए शुरू में संक्षेप में अपने सहयात्रियों के बारे में बता दूं। टूर ऑपरेटर-कम-ड्राइवर महोदय के बारे में तो मैं बता ही चुका हूँ। बस में शुरू की दो पंक्तियों में एक गुजराती परिवार था जिसमें एक पति-पत्नी, उनकी दो बेटियां, जिनमें से एक ‘सी.ए.’ थी जैसा उन्होंने बताया और एक बेटा जो शायद बारहवीं कक्षा में पढ़ रहा था। उनके बाद दो मद्रासी वृद्धाएं थीं, जो सहेलियां थीं, जिनमें से एक के संबंधी लंदन में रहते हैं। दोनो महिलाएं 70 वर्ष के आसपास उम्र की थीं, एक का बेटा अमरीका में है, जहाँ वह इसके बाद जाने वाली थीं।


वैसे सभी लोग क्योंकि लंदन से इस यात्रा पर रवाना हुए थे, तो जाहिर है कि सभी के संबंधी लंदन में रहते थे और वे वहाँ से ही रवाना हुए थे। हाँ तो बाकी लोग तो रह ही गए, एक परिवार केरल का था, जिसमें युवा माता-पिता और उनकी एक 8-10 साल की बेटी थी। उनके पीछे था कलकत्ता से आया एक परिवार, जो थोड़ा अंग्रेजी संस्कृत्ति से ज्यादा मुतमइन था। मियां-बीबी और छोटा बेटा, जो या तो कभी-कभी बंगला बोलते थे, या ज्यादातर तीनों मिलकर अंग्रेजी में कोई गेम खेलते रहते थे।


अंत में चार लोगों की एक सीट थी, जिस पर हम पति-पत्नी, और हमारे अलावा बंगलौर से आए एक और पति-पत्नी थे, शायद 50 वर्ष के आसपास उम्र के थे।

दूसरे दिन के भ्रमण के बारे में अधिक नहीं बता पाऊंगा, क्योंकि यह शुद्ध प्रकृति की गोद में यात्रा थी, लंबी-चौड़ी सुंदर फैली-पसरी झीलें, बीच-बीच में पहाड़ों घाटियों के बीच सुंदर व्यू-पाइंट, जिसकी खूबसूरती ही उसका वर्णन होती है। लेकिन दिक्कत ये है कि मुझे अभी ठीक से फोटो डालना नहीं आता!

खैर नाम के तौर पर बताऊं तो दूसरे दिन हम इन स्थानों पर गए- लोच-लोमंड जो स्कॉटलैंड की बहुत सुंदर और विशाल झील है, जिसके पास लाल हिरण काफी रहते हैं। यहाँ अत्यंत सुंदर झरना है- ‘फाल ऑफ फलोच, जिसका दृश्य देखते ही बनता है। ब्रिटेन के सबसे ऊंचे पहाडों की छाया में बसे फोर्ट विलियम नगर में गए, वहाँ हमने भोजन किया और उसके बाद आगे ऊंचे पहाडों ‘बेन नेविस’ के बीच रोपवे ट्रॉली ‘गोंडोला’ से ऊपर गए, लेकिन अचानक बरसात आ जाने के कारण हम इसका अधिक आनंद नहीं ले पाए।

लौटते समय हमने फोर्ट विलियम में ही एक दुकान से थ्री डाइमेंशन तस्वीरें लीं जो हमें देखने में बहुत अच्छी लगीं। टूर ऑपरेटर ने बताया था कि यहाँ से सस्ते गिफ्ट आइटम, इधर कहीं नहीं मिलेंगे। कुछ ऐसा ही लगा भी। लौटते समय भी सुंदर पहाड़ और झीलें लुभाते रहे, नाम में क्या रखा है लेकिन कुछ नाम थे- कैलेडोनिअन कैनाल, फोर्ट ऑगस्टस विलेज, लोच (झील) नेस मॉन्स्टर, जिसमें माना जाता है कि दैत्याकार जानवर रहते थे।

दूसरे दिन की यात्रा का विवरण इतना ही, अब कल बात करेंगे तीसरे और अंतिम दिन के बारे में।

नमस्कार।

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स्कॉटलैंड यात्रा-3 (2018)

लंदन में रहते हुए, आज फिर से जो अनुभव शेयर कर रहा हूँ वे पिछले वर्ष के हैं। आज स्कॉटलैड यात्रा के अनुभव शेयर करने का तीसरा और अंतिम दिन है। लीजिए प्रस्तुत है स्कॉटलैंड यात्रा से जुड़ा यह अंतिम विवरण-

 

अब स्कॉटलैंड यात्रा में तीसरे और अंतिम दिन के बारे में बात करते हैं, जैसा कि प्रोग्राम था, उसके अनुसार नाश्ता करने के बाद होटल से चेक आउट करके निकलना था और हम लोगों ने ऐसा ही किया।

अंतिम दिन का प्रमुख आकर्षण था- एडिनबर्ग, जो कि एक ऐतिहासिक नगर होने के अलावा स्कॉटलैंड की राजधानी भी है। नगर में पहुंचने के बाद हमने रानी का महल देखा, जहाँ वे अपने एडिनबर्ग प्रवास के दौरान रहती हैं। जैसा कि होता है बहुत भव्य महल है। उसके सामने ही स्कॉटलैंड की संसद का भवन भी है।

इन दो प्रमुख भवनों के पास ही, ऊंची कार्ल्टन पहाड़ी पर विकसित की गई एक सिटी ऑब्ज़र्वेटरी है जहाँ से नगर का बहुत सुंदर दृश्य दिखाई देता है। इस पहाड़ी पर एक पुर्तगाली तोप भी है, और लोगों ने यहाँ से नगर के बहुत सुंदर चित्र लिए।

 

इसके बाद अनेक स्थानों का भ्रमण करते हुए टूर ऑपरेटर ने हम लोगों को ‘एडिनबर्ग कैसल’ के पास छोड़ दिया क्योंकि इसके पास का इलाका बहुत सुंदर और गतिविधिपूर्ण है, मानो दिल्ली का कनॉट प्लेस, हालांकि वहाँ जो दृश्य देखने को मिले वे बहुत ही भव्य थे। वहाँ पास ही में राष्ट्रीय संग्रहालय,राष्ट्रीय पुस्तकालय आदि भी हैं।

‘एडिनबर्ग कैसल’ काफी ऊंचाई पर स्थित है और बहुत भव्य है, वहाँ देखने वालों की भारी भीड़ होती है। वहाँ से नीचे उतरते हुए सेंट गाइल्स कैथेड्रल और बाजार में अनेक जीवंत आकर्षण हैं। वहाँ एक भव्य मूर्ति है, जिसके बारे में माना जाता है कि उसके पांव के पंजे पर हाथ रगड़ने से लोगों की किस्मत चमक जाती है। बाजार में लगातार आकर्षण देखने को मिलते हैं, बहुत से डॉगी चश्मा पहने बैठे दिखाई देते हैं और उनका स्वामी संगीत का साज़ बजाते हुए उन दोनो के लिए कमाई कर रहा होता है।

इसी बाज़ार के पास राष्ट्रीय संग्रहालय है, जिसमें अत्यधिक आकर्षक वस्तुओं का संग्रह है। इसके पास ही ‘बॉबी’ नाम के एक कुत्ते की मूर्ति बनी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह अपने मालिक की मृत्यु के बाद, अपनी मृत्यु तक उसकी कब्र पर ही बैठा रहता था। इस कुत्ते को देखने के लिए बहुत लोग आते थे, अब उसकी मूर्ति को देखने आते हैं।
इस प्रकार तीन दिन की इस यात्रा में अनेक दर्शनीय स्थानों और प्रकृति की अनूठी छवियों को देखने, उसे यथासंभव अपने कैमरों में कैद करने के बाद हम लोग वापसी की लगभग 9 घंटे लंबी यात्रा पर रवाना हुए और रास्ते में कुछ स्थानों पर चाय-पानी के रुकते हुए हम वापस चले, और रात को 12 बजे के बाद हम वापस लंदन पहुंचे।

जैसे कि हर अनुभव करता है, इस यात्रा ने भी हम लोगों को भीतर से समृद्ध किया।
नमस्कार।

आज के लिए इतना ही।
नमस्कार।

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