जग में रह जाएंगे, प्यारे तेरे बोल!

आज फिर से मैं हम सबके प्यारे मुकेश जी का एक बहुत प्यारा गीत शेयर कर रहा हूँ, और इस गीत के माध्यम से ही मैं मुकेश जी, राज कपूर साहब और मजरूह सुल्तानपुरी साहब को भी याद कर रहा हूँ|

यह गीत फिल्म – ‘धरम करम’ से है, जिसमें राज कपूर साहब ने पहली बार अपने बेटे रणधीर कपूर के निर्देशन में काम किया था |

इस गीत का संगीत राहुल देव बर्मन जी ने तैयार किया था और मजरूह सुल्तानपुरी साहब के लिखे इस गीत में जीवन जीने के तरीके के बारे में एक खूबसूरत संदेश भी दिया गया है| लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी के मधुर स्वर में तैयार किया गया यह सुरीला गीत:


इक दिन बिक जाएगा, माटी के मोल
जग में रह जाएंगे, प्यारे तेरे बोल,
दूजे के होंठों को, देकर अपने गीत
कोई निशानी छोड़, फिर दुनिया से डोल
इक दिन बिक जायेगा …

ला ला ललल्लल्ला

अनहोनी पग में काँटें लाख बिछाए
होनी तो फिर भी बिछड़ा यार मिलाए,
ये बिरहा ये दूरी, दो पल की मजबूरी
फिर कोई दिलवाला काहे को घबराये, तरम्पम,
धारा, जो बहती है, बहके रहती है
बहती धारा बन जा, फिर दुनिया से डोल
एक दिन …

परदे के पीछे बैठी साँवल गोरी
थाम के तेरे मेरे मन की डोरी,
ये डोरी ना छूटे, ये बन्धन ना टूटे
भोर होने वाली है अब रैना है थोड़ी, तरम्पम,
सर को झुकाए तू, बैठा क्या है यार
गोरी से नैना जोड़, फिर दुनिया से डोल
एक दिन …


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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