हवा की ज़ंजीरें पहनेंगे धूम मचाएँगे!

मौज-ए-हवा की ज़ंजीरें पहनेंगे धूम मचाएँगे,
तन्हाई को गीत में ढालेंगे गीतों को गाएँगे|

राही मासूम रज़ा

पिछले पहर नींद आने की रातें!

सर-ए-शाम से रतजगा के वो सामाँ,
वो पिछले पहर नींद आने की रातें|

फ़िराक़ गोरखपुरी

ऐश-ए-दुनिया की जुस्तुजू मत कर!

ऐश-ए-दुनिया की जुस्तुजू मत कर,
ये दफ़ीना मिला नहीं करता|

मुनीर नियाज़ी

सोग मनाना फ़ुज़ूल था!

बर्बादियों का सोग मनाना फ़ुज़ूल था,
बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया|

साहिर लुधियानवी

करते हैं आज़ादाना हम!

क़ैद होकर और भी ज़िंदाँ में उड़ता है ख़याल,
रक़्स ज़ंजीरों में भी करते हैं आज़ादाना हम|

अली सरदार जाफ़री

बचपन के ज़माने नहीं आते!

उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में,
फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते|

बशीर बद्र

जी लेना तो ज़िंदगी नहीं है!

है और ही कारोबार-ए-मस्ती,
जी लेना तो ज़िंदगी नहीं है|

अली सरदार जाफ़री

आ गए होते सबा के साथ!

रक़्स-ए-सबा के जश्न में हम तुम भी नाचते,
ऐ काश तुम भी आ गए होते सबा के साथ|

कैफ़ी आज़मी

तेरे बाद कुछ भी नहीं है कम!

किसी आँख में नहीं अश्के-ग़म, तेरे बाद कुछ भी नहीं है कम,
तुझे ज़िन्दगी ने भुला दिया, तू भी मुस्कुरा उसे भूल जा।

अमजद इस्लाम

कपड़े फाड़े, शोर किया!

जब-जब मौसम झूमा हमने कपड़े फाड़े, शोर किया,
हर मौसम शाइस्ता रहना कोरी दुनियादारी है|

निदा फ़ाज़ली