आ गए होते सबा के साथ!

रक़्स-ए-सबा के जश्न में हम तुम भी नाचते,
ऐ काश तुम भी आ गए होते सबा के साथ|

कैफ़ी आज़मी

तेरे बाद कुछ भी नहीं है कम!

किसी आँख में नहीं अश्के-ग़म, तेरे बाद कुछ भी नहीं है कम,
तुझे ज़िन्दगी ने भुला दिया, तू भी मुस्कुरा उसे भूल जा।

अमजद इस्लाम

कपड़े फाड़े, शोर किया!

जब-जब मौसम झूमा हमने कपड़े फाड़े, शोर किया,
हर मौसम शाइस्ता रहना कोरी दुनियादारी है|

निदा फ़ाज़ली

किसे है कल की ख़बर-

ये एक शब की मुलाक़ात भी ग़नीमत है,
किसे है कल की ख़बर थोड़ी दूर साथ चलो|

अहमद फ़राज़

हाथ में पत्थर उठा लिए!

दो चार बार हम जो कभी हँस-हँसा लिए,
सारे जहां ने हाथ में पत्थर उठा लिए|

कुंवर बेचैन