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अब कहाँ हैं चाणक्य!

शीर्षक पढ़कर आप पता नहीं क्या सोचेंगे! यह भी संभव कि इसको आप आज के किसी राजनैतिक व्यक्तित्व से भी जोड़कर देखने लगें| चाणक्य तो बहुत पहले हुए थे, मौर्यवंश के जमाने में, जिन्होंने सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य को गद्दी पर बैठाया, उसके बाद बिन्दुसार हुए और चाणक्य की पारखी निगाहों ने अशोक को भविष्य में सिंहासन संभालने के लिए चुना और इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक वातावरण तैयार किया|


आपको ऐसा लग सकता है कि मेरा इतिहास संबंधी ज्ञान ठीकठाक है, तो मैं बता दूँ कि ऐसा बिल्कुल नहीं है| दरअसल मैं आजकल ‘वूट’ (VOOT) पर सीरियल ‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ देख रहा हूँ, जिसमें चाणक्य की भूमिका अभिनेता- मनोज जोशी ने निभाई है, यह सीरियल बहुत पहले टेलीकास्ट हो चुका है, लेकिन हम इसको आजकल देख रहे हैं| वास्तव में कुछ कार्यक्रमों में हम इतने ज्यादा इनवॉल्व हो जाते हैं कि क्या कहें|


इस सीरियल में भी लगभग उतने ही खलनायक और खलनायिकाएँ हैं, जितने सामान्यतः आजकल के सीरियल्स में होते हैं, और फिर बड़ी बात यह है कि यहाँ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खलनायक और खलनायिकाएँ शामिल हैं, भारतीय तो हैं ही, यूनानी और खुरासानी भी हैं|

यह ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित सीरियल है, जिसमें मौर्यवंश के शासन काल का कुछ हिस्सा दिखाया गया है, और अभी तक जितना हमने देखा है, उसमें अशोक अभी बालक है, जिसे चाणक्य उसके शासक पिता बिन्दुसार के पास ले आए हैं, अनेक बाधाओं के बाद, अशोक और उसकी माता ‘धर्मा’ को राजवंश में उनका उचित स्थान दिला दिया गया है, और जबकि चाणक्य अशोक को भावी शासक बनने के लिए तैयार करने में लगे थे, चाणक्य जिनका सपना था कि अखंड भारत का गौरव और सम्मान, सम्राट अशोक के माध्यम से और बढ़े, उस स्वप्न दृष्टा चाणक्य को देशी-विदेशी खलनायक/खलनायिकाएं मिलकर मार डालते हैं, यहाँ तक पहुंचे हैं हम!


ये दुष्टात्माएँ भारत गौरव का स्वप्न देखने वाले, युगदृष्टा- चाणक्य की हत्या करते हैं, वे चाणक्य जिनका अर्थशास्त्र और राजनीति संबंधी दर्शन आज भी पढ़ा जाता है, वे भी इन लोगों के छल का शिकार हो जाते हैं!


हत्या के इस षडयंत्र में शामिल होते हैं- यूनानी राजमाता- हेलेना, जो अपने पुत्र जस्टिन को सिंहासन पर नहीं बैठा पाई थी, चाणक्य के कारण ही, और एक बार अपना षडयंत्र असफल हो जाने के बाद, अपने स्थान पर अपने पुत्र जस्टिन की कुर्बानी दे देती है| वह षडयंत्र था पूरे मौर्यवंश को लाक्षागृह में जलाकर मार डालने का| जिसमें ईरानी और खुरासानी दोनों शामिल थे|


खैर मैं कहानी के बारे में बहुत ज्यादा चर्चा नहीं करूंगा, लेकिन ऐसा ही लगता है कि जैसे राजमहल में हर कोई षडयंत्रकारी है| खुरासानी सेनानायक – मीर खुरासन, जिसकी पुत्री राजा बिंदुसार की एक रानी है, लेकिन वह चोरी छिपे प्रेम करती है ईरानी राजमाता के पुत्र- जस्टिन से और वास्तव में उसने जस्टिन के ही बेटे को जन्म दिया है, जो सिर्फ वह जानती है और जस्टिन की मृत्यु के बाद वो ये बात राजमाता को बता देती है और इस प्रकार षडयंत्र में ईरानी और खुरासानी एक साथ हो जाते हैं, (वास्तव में) जस्टिन के पुत्र श्यामक को गद्दी पर बैठाने के लिए राजमाता प्रयासरत है|


उधर बड़ी रानी-चारुमित्रा अपने पुत्र सुशीम को गद्दी पर बैठाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है, और सुशीम को भी अनैतिक साधनों का सहारा लेने में कोई संकोच नहीं होता| चारुमित्रा ‘काले जादू’ का सहारा लेकर अशोक और उसकी माँ को अपने मार्ग से हटाना चाहती है| उधर महा अमात्य- खल्लघट को यह कुंठा है कि चाणक्य के रहते उसको अधिक महत्व नहीं मिल पाता है|


इस प्रकार जितने भी खलनायक हैं, उन सबको लगता है कि चाणक्य के रहते उनके मंसूबे पूरे नहीं हो पाएंगे, और अंततः वे किसी बहाने से चाणक्य को एकांत स्थान पर बुलाते हैं और मिलकर उसकी हत्या कर देते हैं| इस हत्या में शामिल होते हैं- राजमाता-हेलेना, महा अमात्य- खल्लघट, रानी- चारुमित्रा, उनका महत्वाकांक्षी परंतु नाकारा पुत्र- सुशीम और यहाँ तक कि वे बालक- श्यामक को भी इस जघन्य अपराध में शामिल कर लेते हैं| इस प्रकार मुझे लगता है कि यह इस ऐतिहासिक धारावाहिक का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था, जबकि षडयंत्रकारियों के मार्ग में चट्टान बनाकर खड़े हुए चाणक्य की मृत्यु हो जाती है|


अब यही देखना है कि चाणक्य ने बालक अशोक पर जो मेहनत की है और जो आशाएँ उससे रखी हैं, वे भविष्य में कहाँ तक पूरी होती हैं| मेरा आशय सीरियल को लेकर है, वैसे तो इतिहास में यह सब बहुत पहले हो चुका है| सीरियल में भी बहुत पहले दिखाया जा चुका है, लेकिन हम तो अब देख रहे हैं न जी!


कुल मिलाकर मुझे यह भी लगा कि आज हम जितनी नैतिकता आदि की बात करते हैं, उस समय राजघरानों में इसका सर्वथा अभाव था| लगता है कि सारे षडयंत्रकारी राजमहल में ही बसे हुए थे|


आज मन हुआ कि चक्रवर्ती सम्राट अशोक सीरियल के इस पड़ाव पर चर्चा कर ली जाए|


आज के लिए इतना ही|
नमस्कार|


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चक्रवर्ती सम्राट अशोक !

आज बात करूंगा सीरियल ‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ के बारे में जो वर्ष 2015-16 के दौरान कलर्स चैनल पर दिखाया गया था| इससे पूर्व मैंने ‘देवों के देव महादेव’ देखा था और उसके बारे में एक आलेख लिखा था| ‘देवों के देव महादेव’ सीरियल देखने में हमें लॉक डाउन के प्रारंभ होने से उसके समाप्त होने तक, लगभग 3 माह का समय लग गया था| अब हम वूट्स (voots) पर ‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ देख रहे हैं, हम प्रतिदिन कम से कम 4-5 एपिसोड देखते हैं और लगता है कि इस वृहद सीरियल को देखने में भी इतना ही लंबा समय लग जाएगा|


अभी तक हमने लगभग 100 एपिसोड देखे हैं, जिनमें बालक अशोक की भूमिका सिद्धार्थ निगम ने निभाई है, चाणक्य की भूमिका में तो मनोज जोशी हैं ही, समीर धर्माधिकारी ने सम्राट बिन्दुसार की भूमिका निभाई है| अब तक जो देखा है, उससे लगता है कि निश्चित रूप से इस सीरियल को देखकर जहां सम्राट अशोक और मौर्य वंश के इतिहास के बारे में काफी जानकारी मिलेगी और काफी मनोरंजन भी होगा| बालक अशोक के कारनामे भी काफी सराहनीय हैं और चाणक्य, जो राजनीति और अर्थशास्त्र के सिद्धांतों के रचयिता हैं, उनके बारे में भी इस सीरियल से उपयोगी जानकारी मिलेगी|


इसमें एक चरित्र राजमाता हेलेना भी है, जो सम्राट चन्द्रगुप्त की विदेशी पत्नी थीं, जिसे सम्राट बिन्दुसार वास्तव में माता जैसा ही सम्मान देते हैं, परंतु उस महिला के मन में प्रतिशोध की ज्वाला धधक रही है, क्योंकि उसका बेटा जस्टिन राजा नहीं बन पाया था| चाणक्य तो जैसा हम सभी जानते हैं मौर्य वंश की प्रतिष्ठा के लिए अपना जीवन खपा देते हैं और जैसा कि अक्सर राज परिवारों के बारे में सुना ही जाता राज भवनों की एक प्रमुख विशेषता होती है- अनेक रानियाँ और निरंतर चलते षडयंत्र!

ऐसे में विदेशी राजमाता- हेलेना की भूमिका में सुजाने बेर्नेट ने भी अपनी खलनायिका वाली भूमिका बड़ी कुशलता से निभाई है, अब इसका मैं क्या करूं कि उनके अभिनय, भाषा और पुत्र मोह को देखकर बरबस श्रीमती सोनिया गांधी की याद आ जाती है| जहां तक हमने देखा है उसमें समूचे मौर्य वंश को राजकुमार जस्टिन के विवाह के लिए बने विशेष ‘लाक्षागृह’ में भस्म करके गुप्त सुरंग से निकाल जाने की हेलेना और उसके साथियों की योजना फेल हो जाती है, हाँ कुछ लोगों की मृत्यु अवश्य होती है, और इस षडयंत्र का दोष राजकुमार जस्टिन, अपनी माँ को बचाने के लिए अपने सिर ले लेते हैं|

अशोक की माँ और बिन्दुसार की चौथी पत्नी- धर्मा, अभी तक राजमहल में सेविका बनकर ही रह रही है और सीरियल में अक्सर यह पता नहीं चलता कि कब किसका, किसके साथ प्रेम चल रहा है और किसके साथ शत्रुता! ऐसा भी लगता है कि यदि आज की तरह वीडियो कैमरे प्रमुख स्थानों पर लगे होते और मोबाइल फोन भी होते तो बहुत सारे षडयंत्र नहीं हो पाते|


खैर ये सीरियल पूरा देख पाने में तो काफी समय लग जाएगा, यही मन में आया कि अभी तक के इस अनुभव को शेयर करते हुए यह बताऊं कि ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित इस सीरियल को देखने का अनुभव काफी अच्छा और उपयोगी होगा, यदि आपके पास इतना धैर्य, रुचि और समय है| आगे चलकर इस सीरियल में सम्राट अशोक की भूमिका भी मोहित रैना निभाएंगे, जिन्होंने ‘देवों के देव महादेव’ में महादेव की भूमिका निभाई थी|

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|


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देवों के देव महादेव!

मैंने पहले भी अपनी ब्लॉग पोस्ट में यह उल्लेख किया है की लॉक डाउन प्रारंभ होने के बाद हमने हॉटस्टार पर धार्मिक सीरियल – ‘देवों के देव महादेव’ देखना प्रारंभ किया था और अभी तक हम इसे देख रहे हैं| हर रोज हम 4-5 एपिसोड तो देख ही लेते हैं, और ऐसा लगता है की अभी भी इसका 20% भाग देखना बाकी है|

 

महादेव जिनको आदि-देव कहा जाता है और उनके साथ आदि-शक्ति जगदंबा पार्वती| वास्तव में कैलाश में बसने वाले महादेव – त्रिदेव के दिव्य सदस्य ऐसे हैं कि जिनके चमत्कारों का वर्णन करना बहुत कठिन है| महादेव और जगत जननी, अनेक बार अनेक रूपों में मिलते हैं| बम भोले कहे जाने वाले महादेव कभी बेलपत्र से प्रसन्न हो जाते हैं और जब रुष्ट हो जाते हैं तब त्रिदेव और सारे देवता उनको मनाने में लग जाते हैं| सभी लोग जब श्रेष्ठ वस्तुओं, सुख-सुविधाओं के पीछे भागते हैं तब महादेव दुनिया के कल्याण के लिए विषपान करते हैं, और देवता लोग अमृत पाकर खुशी मनाते हैं|

देवताओं पर जब संकट आता है, तब वे महादेव की शरण में आते हैं और बाद में उनको भूल जाते हैं, अहंकार में डूब जाते हैं| इन्द्र के अहंकारी स्वभाव के अनेक उदाहरण इस कथा में आते हैं| तुलसीदास जी ने देवताओं के बारे में लिखा है-

आए देव सदा स्वारथी, बात करहीं जनु परमारथी|

महादेव के यशस्वी पुत्र- कार्तिकेय, जो देवताओं के सेनापति थे, गणेश जी, जिनको उनके श्रेष्ठ गुणों और बुद्धिमत्ता के कारण- प्रथम पूज्य होने का सम्मान प्राप्त हुआ| इनकी पुत्री – अशोक सुंदरी, जिनके पति नहुष देवराज इन्द्र का आसन भी प्राप्त कर लेते हैं लेकिन अपने अहंकार के कारण एक ऋषी से श्राप पाकर सर्प बन जाते हैं|

ऐसे अनेक पौराणिक पात्र हैं जिनकी कथाएँ इस विराट सीरियल के माध्यम से जानने को मिलती हैं| कुछ पात्र हैं- महादेव की ही ऊर्जा से उत्पन्न – जलंधर और अंधक, जलंधर तो त्रिलोकाधिपति भी बन जाते हैं, इनके अलावा बाणासुर जो महादेव के आशीष से ही महाबली बनता है और फिर सबके लिए खतरा बन जाता है|

ऐसा लगता है कि असुर लोग पहले शक्तियाँ प्राप्त करने के लिए ही तपस्या करते हैं और फिर उन देवों के लिए भी खतरा बन जाते हैं, जिनसे वे वरदान प्राप्त कराते हैं| कुछ ऋषी तो ऐसा लगता है कि हमेशा श्राप देने के लिए ही तैयार रहते हैं, लेकिन कहा जाता है कि उनके श्राप भी दुनिया के कल्याण के लिए ही होते हैं|
तुलसीदास जी ने महादेव और माता पार्वती के बारे में लिखा है-

भवानी शंकरौ वंदे, श्रद्धा विश्वास रूपिणौ

वास्तव में माता भवानी के मन में अपार श्रद्धा है, लेकिन वैसा अडिग विश्वास नहीं है, जैसा महादेव के मन में है, शायद यही कारण है कि वे जब श्रीराम को सीता जी की खोज में वन में भटकते हुए देखते हैं, तब वे सीता माता का वेष बदलकर उनकी परीक्षा लेने चली जाती हैं| श्रीराम उनको तुरंत पहचान कर प्रणाम करते हैं और इसके बाद महादेव उनको अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करने से इंकार कर देते हैं, क्योंकि उन्होंने सीता का रूप धरा था, जिनको महादेव अपनी माता का दर्जा देते हैं|

ऐसे अनेक पौराणिक प्रसंग इस सीरियल में आते हैं, जिनको देखना और जानना सभी के लिए अच्छा होगा| जब यह सीरियल प्रसारित हुआ था तब शायद एक वर्ष से अधिक तक प्रसारित हुआ था, हमने इसको लॉक डाउन की अवधि में देखा है और आशा है कि जल्द ही इसे पूरा कर लेंगे|

एक त्रुटि मुझे इस सीरियल में, काल-क्रम की दृष्टि से लगी, शायद सीरियल निर्माताओं तक मेरी बात पहुँच पाए| सीरियल में यह दिखाया कि आदि शक्ति पहले जन्म में सती के रूप में श्रीराम जी की परीक्षा लेती हैं और बाद में पार्वती के रूप में पुनः महादेव से मिलती हैं| लेकिन फिर पार्वती के रूप में उनके अवतार के बाद ही श्रीराम का जन्म दिखाया गया है और वे सीता जी को विवाह के लिए आशीर्वाद भी देती हैं|

इस सीरियल में प्रसंग तो इतने हैं कि उनको लिखते ही जा सकते हैं, लेकिन मैं इतना ही कहना चाहूँगा कि यह सीरियल देखने लायक है| एक बात और मेरी 6 वर्ष की पोती भी यह सीरियल नियमित रूप से देखती है और कभी-कभी ऐसी भाषा बोलती है- ‘आपकी आज्ञा का पालन करना मेरा दायित्व है’|

आज के लिए इतना ही|
नमस्कार|

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अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव के अवसर पर पणजी, गोवा में सजावट

 

पणजी, गोवा में चल रहे 50 वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव, आईएफएफआई-2019 का आज 28 नवंबर को अंतिम दिन है। ‘IFFI@50’ में फिल्म के शौकीन लोगों को अनेक श्रेष्ठ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्में देखने को मिलीं।

 

 

इस अवसर पर पणजी, गोवा में आने वाले मेहमानों को लुभाने और इस अवसर को सेलीब्रेट करने के लिए बहुत सुंदर सजावट की जाती है, जिसमें इस उत्सव के प्रतीक ‘गोल्डन पीकॉक’ को अनेक स्थानों पर लगाया जाना, अनेक स्थानों पर ‘ओपन एयर फिल्म शो’ आयोजित किया जाना, सड़क के किनारे कलाकारों की प्रस्तुतियां, कलाकृतियों के स्टॉल आदि लगाया जाना भी शामिल होता है।

इस अवसर पर कला अकादमी और ‘आइनॉक्स थियेटर’ को भी आकर्षक ढंग से सजाया गया था।

 

वैसे तो बहुत कुछ है जो शेयर किया जा सकता है, बस दो चित्र और,

 

आज बस इस अवसर पर की गई सजावट की कुछ झलकियां प्रस्तुत कर रहा हूँ।

नमस्कार।

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फिल्म उत्सव, आईएफएफआई-2019 में आज

पणजी, गोवा में चल रहे 50 वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव, आईएफएफआई-2019 में आज 23 नवंबर की खबर यह है कि फिल्म स्टार श्री अनिल कपूर आज कला अकादमी के निकट इंटरएक्टिव डिजिटल एग्जिबिशन ‘IFFI@50’ देखने के लिए गए। प्रस्तुत हैं इस अवसर के कुछ चित्र।

चित्र और विवरण बॉलीवुड प्रेस/मीडिया फोटोग्राफर- श्री कबीर अली (कबीर एम. लव) के सौजन्य से।

नमस्कार।

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गोवा का वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय फिल्म मेला- IFFI 2019

गोवा भारत का एक प्रमुख पर्यटन केंद्र है, जहाँ देश-विदेश से सैलानी आकर्षक समुद्र-तटों को देखने और प्रदूषण मुक्त वातावरण में फुर्सत के कुछ पल बिताने के लिए आते हैं। विशेष रूप से जब देश के अनेक भागों में सर्दी पड़ रही होती है तब भी यहाँ पर मौसम सुहाना होता है। इस प्रकार के पर्यटन स्थलों पर सैलानियों को कुछ और गतिविधियां भी आकर्षित करती हैं। गोवा के मामले में ऐसी ही एक गतिविधि है अंतर्राष्ट्रीय फिल्म मेला अर्थात IFFI, जिसका कल 20 नवंबर को उद्घाटन हुआ।

 

 

आईएफएफआई-2019 का उद्घाटन कल पणजी, गोवा में बड़ी धूमधाम के साथ हुआ। इस फिल्म मेले के स्वर्ण जयंती समारोह का उद्घाटन केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री- श्री प्रकाश जावड़ेकर ने सिनेमा जगत की दो महान हस्तियों- श्री अमिताभ बच्चन और श्री रजनीकांत की गौरवशाली उपस्थिति में किया, जिनको फिल्म जगत में एक लंबी पारी पूरी करने के अवसर पर सम्मानित भी किया गया। अमिताभ बच्चन जी ने अपने फिल्मी करियर के 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं और श्री रजनीकांत भी लगभग इतने ही समय से लोगों को अपने अभिनय से चमत्कृत कर रहे हैं।

 

नौ दिन तक चलने वाले इस समारोह में 76 देशों की 200 से अधिक फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी तथा सिनेमा प्रेमियों के लिए अपनी रुचि के अनुसार श्रेष्ठतम फिल्में देखने का यह सुनहरा अवसर है। इस बार के फिल्म मेले में रूसी फिल्मों को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जा रहा है।

 

 

इस फिल्म मेले के भव्य उद्घाटन समारोह का संचालन, श्री अमिताभ बच्चन और श्री रजनीकांत जैसी दिव्य हस्तियों की उपस्थिति में प्रमुख फिल्मी व्यक्तित्व श्री करन जौहर ने किया, और इन विशिष्ट अतिथियों द्वारा केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री- श्री प्रकाश जावड़ेकर के साथ मिलकर, इस समारोह के प्रारंभ की घोषणा की गई।

 

 

इस समारोह में श्री रजनीकांत को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए एक विशेष पुरस्कार ‘आइकन ऑफ गोल्डन जुबिली एवार्ड’ से सम्मानित किया गया, जो इस 50 वें फिल्म उत्सव से ही प्रारंभ किया गया है। अपने योगदान से फ्रेंच सिनेमा की पहचान बन चुकी अभिनेत्री- सुश्री इसाबेले अन्ने मेडेलीने हुपर्ट को इस अवसर पर ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट एवार्ड’ प्रदान किया गया।

 

 

इस अवसर पर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री- श्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ऐसा वातावरण तैयार किया जा रहा है कि अधिक से अधिक विदेशी निर्माता, बिना किसी असुविधा के भारत में अपनी फिल्मों की शूटिंग कर पाएं और इस प्रकार हमारे देश का प्रकृतिक सौंदर्य पूरी दुनिया तक पहुंचे। अब उन निर्माताओं को एक बिंदु से ही शूटिंग की अनुमति मिल पाएगी और अनेक स्थानों पर नहीं भटकना पड़ेगा। इस प्रकार उन निर्माताओं को भी आसानी होगी और गोवा, लेह-लद्दाख, अंडमान निकोबार जैसे स्थानों को भी इसका लाभ मिलेगा।

 

 

मंत्री जी ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी, संगीत तथा फिल्में हमारी मृदुल शक्ति हैं और हमें इनको आगे बढ़ाना चाहिए। हर फिल्मी चरित्र हमारे मस्तिष्क पर लंबे समय तक बनी रहने वाली छाप छोड़ता है और उसमें हमारे विचार तथा हमारा मूड बदलने की शक्ति होती है। उन्होंने कहा कि भारतीय फिल्मों के दर्शक लगातार बढ़ रहे हैं और आज दुनिया भर में भारतीय फिल्में देखी जाती हैं। मंत्री जी ने कहा कि इस समारोह में दुनिया भर की अनेक अच्छी फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी और यह गोवा के पूर मुख्यमंत्री स्व. मनोहर पर्रिकर जी के प्रति हमारी विनम्र श्रद्धांजलि होगी।

 

 

श्री रजनीकांत जी ने ‘आइकन ऑफ गोल्डन जुबिली एवार्ड’ स्वीकार करते हुए, श्री अमिताभ बच्चन जी के कर कमलों से यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने यह पुरस्कार उन सभी निर्माताओं, निर्देशकों और तकनीशियनों को समर्पित किया, जिनके साथ उन्होंने फिल्मों मे काम किया है तथा अपने प्रशंसकों के प्रति आभार व्यक्त किया ।

श्री अमिताभ बच्चन ने अपना सम्मान किए जाने पर हार्दिक आभार व्यक्त किया और कहा कि वे आईएफएफआई के बहुत आभारी हैं  कि उनका सम्मान किया गया और उनकी फिल्मों का विशेष प्रदर्शन किया जा रहा है। श्री अमिताभ बच्चन ने यह भी कहा कि आज फिल्में हमारे जीवन का अटूट हिस्सा बन गई हैं। गोवा में इतना विशाल फिल्म उत्सव आयोजित होने से गोवा दुनिया भर में हो रही गतिविधियों की झलक मिलती है और उनको बाहर के लोगों से मिलने-जुलने का अवसर मिलता है।

 

 

सूचना एवं प्रसारण सचिव श्री अमित खरे ने इस समारोह की प्रमुख विशेषताओं की जानकारी दी और यह बताया कि 1952 में जहाँ इसमें 23 देशों ने भाग लिया था, इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 76 हो गई है।

गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन में हर प्रकार की फिल्में शामिल हैं और यह समारोह भारतीय और विदेशी निर्माताओं, कलाकारों को एक-दूसरे के निकट लाता है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि फिल्में समाज के दर्पण के रूप में काम करती हैं।

इस समारोह शामिल हुए कुछ प्रमुख व्यक्ति हैं- विश्व विख्यात सिनेमेटोग्राफर और आईएफएफआई इंटरनेशनल जूरी चेयरमैन- जॉन बेली, भारतीय फिल्म निर्माता और भारतीय जूरी के अध्यक्ष- श्री प्रियदर्शन और अन्य जूरी सदस्य, रूसी प्रतिनिधिमंडल की प्रामुख- मारिया लेमेशेवा और अन्य अनेक गणमान्य अतिथि इस समारोह में शामिल हुए।

इस आयोजन में इन फिल्म समारोहों को गोवा की पहचान बनाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री स्व. मनोहर पर्रिकर को, उनके योगदान को रेखांकित करने वाली एक लघुफिल्म के माध्यम से भावभीनी श्रंद्धांजलि दी गई। इस आयोजन में जिन प्रमुख भारतीय फिल्मी हस्तियों को सम्मानित किया गया उनमें श्री रमेश सिप्पी, श्री एन. चंद्रा, श्री पी.सी.श्रीराम शामिल थे।

समारोह में शामिल कुछ प्रमुख व्यक्तियों में केंद्रीय आयुष मंत्री- श्री श्रीपद नायक, केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री- श्री बाबुल सुप्रियो, केंद्रीय फिल्म सर्टिफिकेशन बोर्ड के अध्यक्ष- श्री प्रसून जोशी आदि शामिल थे।

इस अवसर पर सूचना एवं प्रसारण मंत्री- श्री प्रकाश जावडेकर ने 50 वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह के अवसर पर एक डाक टिकट भी जारी की। उद्घाटन में अनेक भव्य प्रस्तुतियां की गईं, जिनमें विख्यात संगीतकार एवं गायक श्री शंकर महादेवन और उनके बैंड की प्रस्तुति ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

फिल्म-समारोह का प्रारंभ इटली की फिल्म ‘डिस्पाइट द फॉग’ (कोहरे के बावज़ूद) से हुआ। इस फिल्म से जुड़े कलाकार और अन्य कर्मी भी फिल्म प्रदर्शन के अवसर पर उपस्थित थे। आईएफएफआई के इस स्वर्ण जयंती उत्सव में लगभग 7000 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

इस आयोजन में 76 देशों की 200 से अधिक प्रतिष्ठित फिल्मों का प्रदर्शन होगा, रूस की फिल्मों पर इस समारोह में विशेष रूप से फोकस किया गया है और भारतीय पैनोरमा खंड में 15 नॉन-फीचर फिल्में भी प्रदर्शित की जाएंगी। ऐसी आशा की जाती है कि इस विशिष्ट समारोह में 10, 000 से अधिक सिनेमा प्रेमी भाग लेंगे और यह समारोह पणजी, गोवा में 28, नवंबर, 2019 को संपन्न होगा।
(उद्घाटन समारोह से संबंधित सभी छायाचित्र- बॉलीवुड फोटोग्राफर श्री कबीर अली (कबीर एम. लव के सौजन्य से)

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