खुश है हम उससे जलते हैं!

क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में,
जो भी खुश है हम उससे जलते हैं|

जॉन एलिया

पहाड़ों के क़दों की–

पहाड़ों के क़दों की खाइयां हैं,
बुलंदी पर बहुत नीचाइयां हैं|

सूर्यभानु गुप्त