शाम आई-याद आई!

लीजिए आज फिर से प्रस्तुत है, एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट- कविताओं और फिल्मी गीतों में शाम को अक्सर यादों से जोड़ा जाता है। यह खयाल आता है कि ऐसा क्या है, जिसके कारण शाम यादों से जुड़ जाती है! यहाँ दो गीत याद आते हैं जो शाम और यादों का संबंध दर्शाते हैं। एक गीत … Read more

दिन की बुझी शिराओं में, एक और उमर आई!

एक बार फिर से मैं आज अपने एक प्रिय कवि स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| यह गीत है शाम का, बचपन में हमने गीत पढ़े थे ग्रामीण परिवेश पर शाम के, जब गोधूलि वेला में बैल रास्ते में धूल उड़ाते हुए घर लौटते हैं| यह शहरी परिवेश में शाम … Read more

सूर्यास्त समुद्र किनारे का!

समुद्र किनारे से सूर्यास्त देखकर एक शेर याद आ रहा है, शायद मीना कुमारी का लिखा हुआ है-     ढूंढ़ते रह जाएंगे, साहिल पे कदमों के निशां, रात के गहरे समंदर में उतर जाएगी शाम।   आज के लिए इतना ही। नमस्कार।   ********

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