इतनी ज़ियादा सफ़ाई न दे!

ख़ता-वार समझेगी दुनिया तुझे,
अब इतनी ज़ियादा सफ़ाई न दे|

बशीर बद्र

अपने अमल का हिसाब क्या देते!

किसी को अपने अमल का हिसाब क्या देते,
सवाल सारे ग़लत थे जवाब क्या देते|

मुनीर नियाज़ी

ज़माने भर को समझाने कहाँ जाते!

चलो अच्छा हुआ काम आ गई दीवानगी अपनी,
वगर्ना हम ज़माने भर को समझाने कहाँ जाते|

क़तील शिफ़ाई

औरों को समझाया है!

कभी-कभी यूँ भी हमने अपने जी को बहलाया है,
जिन बातों को खुद नहीं समझे, औरों को समझाया है|

निदा फ़ाज़ली