ले के गिरेबाँ का तार तार चले!

हुज़ूर-ए-यार हुई दफ़्तर-ए-जुनूँ की तलब,
गिरह में ले के गिरेबाँ का तार तार चले|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तुम्हारे नाम पे आयेंगे!

बड़ा है दर्द का रिश्ता ये दिल गरीब सही,
तुम्हारे नाम पे आयेंगे ग़म-गुसार चले|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जो कू-ए-यार से निकले तो–

मकाम ‘फ़ैज़’ कोई राह में जँचा ही नहीं,
जो कू-ए-यार से निकले तो सू-ए-दार चले|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जो हम पे गुज़री सो गुज़री!

जो हम पे गुज़री सो गुज़री मगर शब-ए-हिज्राँ,
हमारे अश्क तेरी आकबत सँवार चले|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आज ज़िक्र-ए-यार चले!

क़फ़स उदास है यारो सबा से कुछ तो कहो,
कहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

गुलशन का कारोबार चले!

गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले,
चले भी आओ के गुलशन का कारोबार चले|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़