जहाँ पहुँचे कामयाब आए!

‘फ़ैज़’ थी राह सर-ब-सर मंज़िल,
हम जहाँ पहुँचे कामयाब आए|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जब भी हम ख़ानुमाँ-ख़राब आए!

जल उठे बज़्म-ए-ग़ैर के दर-ओ-बाम,
जब भी हम ख़ानुमाँ-ख़राब आए|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दिल में यूँ रोज़ इंक़लाब आए!

न गई तेरे ग़म की सरदारी,
दिल में यूँ रोज़ इंक़लाब आए|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आज तुम याद बे-हिसाब आए!

कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब,
आज तुम याद बे-हिसाब आए|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मेहर-ओ-वफ़ा के बाब आए!

उम्र के हर वरक़ पे दिल की नज़र,
तेरी मेहर-ओ-वफ़ा के बाब आए|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

फिर वो बे-नक़ाब आए!

हर रग-ए-ख़ूँ में फिर चराग़ाँ हो,
सामने फिर वो बे-नक़ाब आए|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दस्त-ए-साक़ी में आफ़्ताब आए!

बाम-ए-मीना से माहताब उतरे,
दस्त-ए-साक़ी में आफ़्ताब आए|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तुझसे तो मुझको प्यार नहीं!

अपनी तकमील कर रहा हूँ मैं,
वरना तुझसे तो मुझको प्यार नहीं|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़