ख़ुद उसी काफिर के हो गये!

समझा रहे थे मुझ को सभी नसेहान-ए-शहर,
फिर रफ्ता रफ्ता ख़ुद उसी काफिर के हो गये|

अहमद फ़राज़

तावीज़ें भी बँधवाओगे!

हर बात गवारा कर लोगे, मन्नत भी उतारा कर लोगे,
तावीज़ें भी बँधवाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जायेगा|

सईद राही