जैसे जैसे घर नियराया!

आज मैं श्रेष्ठ नवगीत एवं ग़ज़ल लेखक स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का एक छोटा सा और खूबसूरत नवगीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| किस प्रकार हम अनेक प्रकार से अपने घर से जुड़े होते हैं| पुराने ग्रामीण परिवेश को याद करके इस गीत का और भी अच्छा आस्वादन किया जा सकता है| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय … Read more

कहीं चलो ना, जी !

आज स्वर्गीय कैलाश गौतम जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| अपने संस्थान में कवि सम्मेलनों का आयोजन करते-करते कैलाश जी से अच्छी मित्रता हो गई थी, बहुत सरल हृदय व्यक्ति थे| उनकी रचनाएँ जो बहुत प्रसिद्ध थीं, उनमें ‘अमौस्या का मेला’ और ‘कचहरी’ – ‘भले डांट घर में तू बीवी की खाना, भले … Read more

अरे, लखिय बाबुल मोरे!

अमीर खुसरो जी की एक रचना आज शेयर कर रहा हूँ| खुसरो जी एक सूफी, आध्यात्मिक कवि थे, और ऐसा भी माना जाता है की खड़ी बोली में कविता का प्रारंभ उनसे ही हुआ था| उनका जन्म 1253 ईस्वी में पटियाली में हुआ था और देहांत 1325 ईस्वी में दिल्ली में हुआ| लीजिए प्रस्तुत है … Read more

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