घर से निकलते क्यों हैं!

लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं,
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं|

राहत इन्दौरी

अपने ही साये से भी डर जाता हूँ मैं!

सारी दुनिया से अकेले जूझ लेता हूँ कभी,
और कभी अपने ही साये से भी डर जाता हूँ मैं|

राजेश रेड्डी

शरमाये भी घबराये भी!

एक पगली मेरा नाम जो ले शरमाये भी घबराये भी,
गलियों गलियों मुझसे मिलने आये भी घबराये भी|

मोहसिन नक़वी