बेटी बेटे!

हमारी हिन्दी फिल्मों के माध्यम से हमको अनेक अमर गीत देने वाले स्वर्गीय शैलेन्द्र जी का आज एक गीत शेयर कर रहा हूँ| यह गीत फिल्म- बेटी-बेटे में फिल्माया गया| गीत में यही है कि किस प्रकार एक माँ अपने बेटे-बेटी को समझाती है कि आज का दिन तो बीत गया अब हमको कल की तैयारी करनी है|

लीजिए प्रस्तुत है शैलेन्द्र जी का यह गीत जो माँ की ममता और गरीबी के संघर्ष को भी बड़ी खूबी से अभिव्यक्त करता है –

आज कल में ढल गया
दिन हुआ तमाम
तू भी सो जा सो गई
रंग भरी शाम|

साँस साँस का हिसाब ले रही है ज़िन्दगी
और बस दिलासे ही दे रही है ज़िन्दगी
रोटियों के ख़्वाब से चल रहा है काम
तू भी सोजा ….

रोटियों-सा गोल-गोल चांद मुस्‍कुरा रहा
दूर अपने देश से मुझे-तुझे बुला रहा
नींद कह रही है चल, मेरी बाहें थाम
तू भी सोजा…

गर कठिन-कठिन है रात ये भी ढल ही जाएगी
आस का संदेशा लेके फिर सुबह तो आएगी
हाथ पैर ढूंढ लेंगे , फिर से कोई काम
तू भी सोजा…


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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कितने भूले हुए ज़ख़्मों का पता याद आया!

आज मैं साहिर लुधियानवी साहब का लिखा एक गीत शेयर कर रहा हूँ| साहिर साहब का यह गीत फिल्म-‘गुमराह’ के लिए महेंद्र कपूर जी ने गाया था और इसका संगीत तैयार किया था रवि जी ने|

लीजिए आज प्रस्तुत है, साहिर लुधियानवी साहब का यह गीत –


आप आए तो ख़याल-ए-दिल-ए नाशाद आया
कितने भूले हुए ज़ख़्मों का पता याद आया

आप के लब पे कभी अपना भी नाम आया था
शोख नज़रों से मुहब्बत का सलाम आया था
उम्र भर साथ निभाने का पयाम आया था
आपको देख के वह अहद-ए-वफ़ा याद आया

रुह में जल उठे बजती हुई यादों के दिए
कैसे दीवाने थे हम आपको पाने के लिए
यूँ तो कुछ कम नहीं जो आपने एहसान किए
पर जो माँगे से न पाया वो सिला याद आया

आज वह बात नहीं फिर भी कोई बात तो है
मेरे हिस्से में यह हल्की-सी मुलाक़ात तो है
ग़ैर का हो के भी यह हुस्न मेरे साथ तो है
हाय ! किस वक़्त मुझे कब का गिला याद आया



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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लेना होगा जनम हमें, कई कई बार!

आज मैं देव आनंद जी की फिल्म ‘प्रेम पुजारी’ के लिए किशोर कुमार जी का गाया एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ, यह गीत नीरज जी ने लिखा था और नीरज जी द्वारा फिल्मों के लिए लिखे गए बहुत प्यारे गीतों में से एक है, इसके संगीत निर्देशक थे फिल्मों में अपनी धुनों के लिए विशेष रूप से जाने पहचाने दादा सचिन देव बर्मन जी और उनकी इस मस्ती भरी धुन पर गीत को किशोर दा ने अपने अनोखे अंदाज में गाया है|

लीजिए प्रस्तुत हैं इस मधुर प्रेम गीत के बोल-



फूलों के रंग से, दिल की कलम से
तुझको लिखी रोज़ पाती
कैसे बताऊँ, किस किस तरह से
पल पल मुझे तू सताती,
तेरे ही सपने, लेकर के सोया
तेरी ही यादों में जागा
तेरे खयालों में उलझा रहा यूँ
जैसे के माला में धागा,

हाँ, बादल बिजली चंदन पानी जैसा अपना प्यार
लेना होगा जनम हमें, कई कई बार|
हाँ, इतना मदिर, इतना मधुर तेरा मेरा प्यार
लेना होगा जनम हमें, कई कई बार|

साँसों की सरगम, धड़कन की वीना,
सपनों की गीतांजली तू
मन की गली में, महके जो हरदम,
ऐसी जुही की कली तू
छोटा सफ़र हो, लम्बा सफ़र हो,
सूनी डगर हो या मेला
याद तू आए, मन हो जाए, भीड़ के बीच अकेला|

हाँ, बादल बिजली, चंदन पानी जैसा अपना प्यार
लेना होगा जनम हमें, कई कई बार

पूरब हो पच्छिम, उत्तर हो दक्खिन,
तू हर जगह मुस्कुराए
जितना भी जाऊँ, मैं दूर तुझसे,
उतनी ही तू पास आए,
आँधी ने रोका, पानी ने टोका,
दुनिया ने हँसकर पुकारा
तसवीर तेरी, लेकिन लिये मैं, कर आया सबसे किनारा
हाँ, बादल बिजली, चंदन पानी जैसा अपना प्यार
लेना होगा जनम हमें, कई कई बार

हाँ, इतना मदिर, इतना मधुर तेरा मेरा प्यार
लेना होगा जनम हमें, कई कई बार
कई, कई बार… कई, कई बार


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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चाल ऐसी है मदहोश मस्ती भरी!

चाल ऐसी है मदहोश मस्ती भरी
नींद सूरज सितारों को आने लगी
इतने नाज़ुक क़दम चूम पाये अगर
सोते सोते बियाबान गाने लगे
मत महावर रचाओ
मत महावर रचाओ बहुत पाँव में
फर्श का मरमरी दिल बहल जाएगा|

नई उमर की नई फसल

सुर्ख होठों पे उफ़ ये हँसी मदभरी!

सुर्ख होठों पे उफ़ ये हँसी मदभरी
जैसे शबनम अंगारो की मेहमान हो
जादू बुनती हुई ये नशीली नज़र
देख ले तो खुदाई परेशान हो
मुस्कुराओ न ऐसे
मुस्कुराओ न ऐसे चुराकर नज़र
आइना देख सूरत मचल जाएगा|

नई उम्र की नई फसल

ये शरमसार मौसम बदल जाएगा!

साँस की तो बहुत तेज़ रफ़्तार है
और छोटी बहुत है मिलन की घडी
गूंथते गूंथते ये घटा साँवरी
बुझ न जाए कही रूप की फुलझड़ी
चूड़ियाँ ही न तुम
चूड़ियाँ ही न तुम खनखनाती रहो
ये शरमसार मौसम बदल जाएगा|

नई उमर की नई फसल

देखती ही रहो आज दर्पण ना तुम !

देखती ही रहो आज दर्पण ना तुम
प्यार का ये महूरत निकल जाएगा
देखती ही रहो आज दर्पण ना तुम
प्यार का ये महूरत निकल जाएगा|
नई उम्र की नई फसल

सारा जहां हमारा 2

खोली भी छिन गई है, बेन्चें भी छिन गई हैं
सड़कों पे घूमता है अब कारवाँ हमारा
जेबें हैं अपनी खाली, क्यों देता वरना गाली
वो सन्तरी हमारा, वो पासबाँ हमारा
चीन-ओ-अरब हमारा …


फिर सुबह होगी

ज़िंदगी, कैसी है पहेली!

फिल्म आनंद, जिसमें एक जमे हुए सुपर स्टार राजेश खन्ना थे और उनके सामने ये थे अपेक्षाकृत नए कलाकार अमिताभ बच्चन, लेकिन इस फिल्म से ही अमिताभ बच्चन ने भी दर्शकों के मन पर अपनी अमिट छाप छोड़ी थी| फिल्म आनंद में बहुत से लाजवाब गाने थे, जिनमें मुकेश जी का गाया गीत – ‘कहीं दूर जब दिन ढल जाए’ भी है और भी एक से बढ़कर एक गीत थे|

खैर आज मैं आनंद फिल्म का जो गीत शेयर कर रहा हूँ, वह मन्ना डे जी का गाया हुआ है, गीत लिखा है योगेश जी ने और सलिल चौधरी जी के संगीत निर्देशन में मन्ना डे साहब ने जीवन दर्शन को समझाने वाले इस गीत को बड़े सुंदर अंदाज में गाया है| लीजिए प्रस्तुत हैं इस गीत के बोल-


ज़िंदगी …
कैसी है पहेली, हाए
कभी तो हंसाये
कभी ये रुलाये
ज़िंदगी …

कभी देखो मन नहीं जागे
पीछे पीछे सपनों के भागे
एक दिन सपनों का राही
चला जाए सपनों के आगे कहाँ
ज़िंदगी …

जिन्होने सजाए यहाँ मेले
सुख-दुख संग-संग झेले
वही चुनकर ख़ामोशी
यूँ चले जाएं अकेले कहाँ
ज़िंदगी …



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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