आशिक़ की बारात हो गई है!

दुनिया है कितनी बे-ठिकाना,
आशिक़ की बारात हो गई है|

फ़िराक़ गोरखपु
री

खेला हूँ तो मात हो गई है!

जीती हुई बाज़ी-ए-मोहब्बत,
खेला हूँ तो मात हो गई है|

फ़िराक़ गोरखपुरी

बीमार की रात हो गई है!

इस दौर में ज़िंदगी बशर की,
बीमार की रात हो गई है|

फ़िराक़ गोरखपुरी

उन ज़ुल्फ़ों में रात हो गई है!

अब हो मुझे देखिए कहाँ सुब्ह,
उन ज़ुल्फ़ों में रात हो गई है|

फ़िराक़ गोरखपुरी

तस्वीर-ए-हयात हो गई है!

जिस शय पे नज़र पड़ी है तेरी,
तस्वीर-ए-हयात हो गई है|

फ़िराक़ गोरखपुरी

शायद कोई बात हो गई है!

मुद्दत से ख़बर मिली न दिल की,
शायद कोई बात हो गई है|

फ़िराक़ गोरखपु
री

क्यूँ ग़म से नजात हो गई है!

ग़म से छूटकर ये ग़म है मुझको,
क्यूँ ग़म से नजात हो गई है|

फ़िराक़ गोरखपुरी

आँखों में जो बात हो गई है!

आँखों में जो बात हो गई है,
इक शरह-ए-हयात हो गई है|

फ़िराक़ गोरखपुरी