लेकिन आग बरसती है!

दिल की खेती सूख रही है कैसी ये बरसात हुई,
ख़्वाबों के बादल आते हैं लेकिन आग बरसती है|

राही मासूम रज़ा

आग बुझा देनी चाहिए!

मैं फूल हूँ तो फूल को गुल-दान हो नसीब,
मैं आग हूँ तो आग बुझा देनी चाहिए|

राहत इंदौरी

मेरा हो घर अच्छा नहीं लगता!

ये क्यूँ बाक़ी रहे आतिश-ज़नो ये भी जला डालो,
कि सब बे-घर हों और मेरा हो घर अच्छा नहीं लगता|

जावेद अख़्तर

गुलफ़ाम से जल जाते हैं!

बच निकलते हैं अगर आतिश-ए-सय्याल से हम,
शोला-ए-आरिज़-ए-गुलफ़ाम से जल जाते हैं|

क़तील शिफ़ाई

शोले तो शोले धुआँ नहीं मिलता!

वो मेरा गाँव है वो मेरे गाँव के चूल्हे,
कि जिनमें शोले तो शोले धुआँ नहीं मिलता|

कैफ़ी आज़मी

और डूब के जाना है!

ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे,
इक आग का दरिया है और डूब के जाना है|

जिगर मुरादाबादी

घर के अन्दर किसने आग लगाई है!

बाहर सहन में पेड़ों पर कुछ जलते-बुझते जुगनू थे,
हैरत है फिर घर के अन्दर किसने आग लगाई है|

क़तील शिफ़ाई

कोई घर भी जलाना नहीं आता!

तारीख़ की आँखों में धुआँ हो गए ख़ुद ही,
तुमको तो कोई घर भी जलाना नहीं आता।

वसीम बरेलवी

ज़िन्दगी आग भी है पानी भी!

दिल को शोलों से करती है सेराब,
ज़िन्दगी आग भी है पानी भी।

फ़िराक़ गोरखपुरी

जलने का क़रीना मुश्किल है!

वह शोला नहीं जो बुझ जाए आँधी के एक ही झोंके से,
बुझने का सलीका आसाँ है, जलने का क़रीना मुश्किल है|

अर्श मलसियानी