घर के अन्दर किसने आग लगाई है!

बाहर सहन में पेड़ों पर कुछ जलते-बुझते जुगनू थे,
हैरत है फिर घर के अन्दर किसने आग लगाई है|

क़तील शिफ़ाई

कोई घर भी जलाना नहीं आता!

तारीख़ की आँखों में धुआँ हो गए ख़ुद ही,
तुमको तो कोई घर भी जलाना नहीं आता।

वसीम बरेलवी

ज़िन्दगी आग भी है पानी भी!

दिल को शोलों से करती है सेराब,
ज़िन्दगी आग भी है पानी भी।

फ़िराक़ गोरखपुरी

जलने का क़रीना मुश्किल है!

वह शोला नहीं जो बुझ जाए आँधी के एक ही झोंके से,
बुझने का सलीका आसाँ है, जलने का क़रीना मुश्किल है|

अर्श मलसियानी

सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है!

लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में,
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है|

राहत इन्दौरी

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में!

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में,
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में|

बशीर बद्र

आतिश-ए-गुलफ़ाम से जल जाते हैं!

बच निकलते हैं अगर आतिश-ए-सय्याद से हम,
शोला-ए-आतिश-ए-गुलफ़ाम से जल जाते हैं|

क़तील शिफ़ाई

आग का दरिया मुझे!

उसको आईना बनाया, धूप का चेहरा मुझे,
रास्ता फूलों का सबको, आग का दरिया मुझे|

बशीर बद्र

तुम जला दो आशियाँ मेरा!

सुकूँ पाएँ चमन वाले हर इक घर रोशनी पहुँचे,
मुझे अच्छा लगेगा तुम जला दो आशियाँ मेरा|

बेकल उत्साही

और फैला है धुआँ मेरा!

किसी बस्ती को जब जलते हुए देखा तो ये सोचा,
मैं ख़ुद ही जल रहा हूँ और फैला है धुआँ मेरा|

बेकल उत्साही