तमाम ग़ुंचे तो खिला नहीं करते!

हर इक दुआ के मुक़द्दर में कब हुज़ूरी है,
तमाम ग़ुंचे तो ‘अमजद’ खिला नहीं करते|

अमजद इस्लाम अमजद

मुझ पे बिखर जाओ किसी दिन!

ख़ुशबू की तरह गुज़रो मिरी दिल की गली से,
फूलों की तरह मुझ पे बिखर जाओ किसी दिन|

अमजद इस्लाम अमजद

चढ़ गया ज़हर गुल मसलते ही!

ख़ून सा लग गया है हाथों में,
चढ़ गया ज़हर गुल मसलते ही|

मुनीर नियाज़ी

उसके बदन की तराश ऐसी है!

सुना है उसके बदन की तराश ऐसी है,
कि फूल अपनी क़बाएँ कतर के देखते हैं|

अहमद फ़राज़

चलो बात कर के देखते हैं!

सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं,
ये बात है तो चलो बात कर के देखते हैं|

अहमद फ़राज़

तुमने क्या मुझ से बेवफ़ाई की!

मेरे होंठों के फूल सूख गए,
तुमने क्या मुझ से बेवफ़ाई की|

बशीर बद्र

रंग मेरे हाथ का हिनाई हो!

हथेलियों की दुआ फूल ले के आई हो,
कभी तो रंग मेरे हाथ का हिनाई हो|

परवीन शाकिर

और कुछ ख़िज़ाँ में खो गए!

लेके अपनी-अपनी किस्मत आए थे गुलशन में गुल,
कुछ बहारों मे खिले और कुछ ख़िज़ाँ में खो गए|

राजेश रेड्डी

आग का दरिया मुझे!

उसको आईना बनाया, धूप का चेहरा मुझे,
रास्ता फूलों का सबको, आग का दरिया मुझे|

बशीर बद्र