ज़मीं से तो कह नहीं सकता!

मैं आसमाँ पे बहुत देर रह नहीं सकता,
मगर ये बात ज़मीं से तो कह नहीं सकता|

वसीम बरेलवी

पाबन्दी-ए-परवाज़ भी है!

नशेमन के लिये बेताब ताईर,
वहाँ पाबन्दी-ए-परवाज़ भी है|

अर्श मलसियानी

टूटे हुए पर बोलते हैं!

मेरी परवाज़ की सारी कहानी,
मेरे टूटे हुए पर बोलते हैं|

राजेश रेड्डी

मेरे पर निकलने लगते हैं!

बुलन्दियों का तसव्वुर भी ख़ूब होता है,
कभी कभी तो मेरे पर निकलने लगते हैं|

राहत इन्दौरी

उड़ने को पर चाहिए!

हर सुबह को कोई दोपहर चाहिए,
मैं परिंदा हूं उड़ने को पर चाहिए।

कन्हैयालाल नंदन

आँधियों का डर न फेंक

जो धरा से कर रही हैं कम गगन का फासला,
उन उड़ानों पर अंधेरी आँधियों का डर न फेंक|

कुंवर बेचैन