भूलना आसान न था!

तुमसे छूट कर भी तुम्हें भूलना आसान न था,
तुमको ही याद किया तुमको भुलाने के लिए|

निदा फ़ाज़ली

उस शख़्स को भुलाए कौन!

अब सुकूं है तो भूलने में है,
लेकिन उस शख़्स को भुलाए कौन|

जावेद अख़्तर

तुझको भुला कर देखूं !

याद आता है के पहले भी कई बार यूं ही
मैने सोचा था के मैं तुझको भुला कर देखूं |

राहत इन्दौरी

ख़ुदा को भुला दें!

अगर ख़ुद को भूले तो, कुछ भी न भूले,
कि चाहत में उनकी, ख़ुदा को भुला दें|

सुदर्शन फ़ाकिर

ये जुनूँ “फ़राज़” कब तक!

किसी बेवफ़ा की ख़ातिर ये जुनूँ “फ़राज़” कब तक,
जो तुम्हें भुला चुका है, उसे तुम भी भूल जाओ|

अहमद फ़राज़

भूलता-सा जा रहा हूँ!

मुहब्बत अब मुहब्बत हो चली है,
तुझे कुछ भूलता-सा जा रहा हूँ|

फ़िराक़ गोरखपुरी

कोई भी चारा न था!


याद करके और भी तकलीफ़ होती थी ‘अदीम’,
भूल जाने के सिवा अब कोई भी चारा न था|

अदीम हाशमी

दिल से उतर क्यूँ नहीं जाता !

वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में,
जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँ नहीं जाता|

निदा फ़ाज़ली