तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता!

मोहब्बत एक ख़ुशबू है हमेशा साथ चलती है,
कोई इंसान तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता|

बशीर बद्र

ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा!

वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा,
मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा|

परवीन शाकिर

फैल गई बात शनासाई की!

कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की,
उसने ख़ुशबू की तरह मेरी पज़ीराई की|

परवीन शाकिर

कोई तस्वीर गाती रही रात भर!

कोई ख़ुशबू बदलती रही पैरहन,
कोई तस्वीर गाती रही रात भर|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ख़ुशबू की तरह रंग हिना का होता!

काँच के पार तिरे हाथ नज़र आते हैं,
काश ख़ुशबू की तरह रंग हिना का होता|

गुलज़ार

बाग़ में कोई ज़रूर था!

निकला जो चाँद आई महक तेज़ सी ‘मुनीर’,
मेरे सिवा भी बाग़ में कोई ज़रूर था|

मुनीर नियाज़ी

कोई तस्वीर गाती रही रात भर!

कोई ख़ुशबू बदलती रही पैरहन,
कोई तस्वीर गाती रही रात भर|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

बादल है कि साया है कि तुम हो!

ये ख़्वाब है ख़ुशबू है कि झोंका है कि पल है,
ये धुँध है बादल है कि साया है कि तुम हो|

अहमद फ़राज़

वो कभी रंग वो कभी ख़ुशबू!

वो कभी रंग वो कभी ख़ुशबू,
गाह गुल गाह रात-रानी है|

फ़िराक़ गोरखपुरी

आ गया काँटों में रहना आ गया!

एक ना-शुकरे चमन को रंग-ओ-बू देता रहा,
आ गया हाँ आ गया काँटों में रहना आ गया|

आनंद नारायण मुल्ला