खोल के फिर आबाद किया!

आज ज़रा फ़ुर्सत पाई थी आज उसे फिर याद किया,
बंद गली के आख़िरी घर को खोल के फिर आबाद किया|

निदा फ़ाज़ली

वक़्त हम को ज़माने नहीं दिया!

कुछ वक़्त चाहते थे कि सोचें तिरे लिए,
तूने वो वक़्त हम को ज़माने नहीं दिया|

मुनीर नियाज़ी