काँटों से दोस्ती कर ली!

मिले न फूल तो काँटों से दोस्ती कर ली,
इसी तरह से बसर हम ने ज़िंदगी कर ली|

कैफ़ी आज़मी

हवा से दोस्ताना चल रहा है!

चराग़ों का घराना चल रहा है,
हवा से दोस्ताना चल रहा है|

राहत इन्दौरी

दुश्मनों की भी राय ली जाए!

दोस्ती जब किसी से की जाए,
दुश्मनों की भी राय ली जाए|

राहत इन्दौरी

क़ुबूल मिरी हर कमी के साथ!

शर्तें लगाई जाती नहीं दोस्ती के साथ,
कीजे मुझे क़ुबूल मिरी हर कमी के साथ|

वसीम बरेलवी

तबीअ’त का समझ बैठे थे हम!

भूल बैठी वो निगाह-ए-नाज़ अहद-ए-दोस्ती,
उसको भी अपनी तबीअ’त का समझ बैठे थे हम|

फ़िराक़ गोरखपुरी

दुश्मनों का भी दिल हिला देगा!

हमसे पूछो न दोस्ती का सिला,
दुश्मनों का भी दिल हिला देगा|

सुदर्शन फ़ाकिर

आदमी से बहुत बड़े हैं पेड़!

मौत तक दोस्ती निभाते हैं,
आदमी से बहुत बड़े हैं पेड़|

सूर्यभानु गुप्त

यार सबको बना लिया न करो!

अपने रुत्बे का कुछ लिहाज़ ‘मुनीर’,
यार सबको बना लिया न करो|

मुनीर नियाज़ी

इख़्लास समझते हो ‘फ़राज़!

तुम तकल्लुफ़ को भी इख़्लास समझते हो ‘फ़राज़,’
दोस्त होता नहीं हर हाथ मिलाने वाला|

अहमद फ़राज़

तुझको अगर भूल जाएँ हम!

अब और क्या किसी से मरासिम बढ़ाएँ हम,
ये भी बहुत है तुझको अगर भूल जाएँ हम|

अहमद फ़राज़