सुदामा और बिल्लू बार्बर!

तुलना करना अक्सर प्रासंगिक नहीं होता, लेकिन हमारी आदत है कि हम तुलना करते रहते हैं| वैसे यह बहुत सी बार चीजों, व्यक्तियों और परिस्थितियों को समझने में सहायक भी होती है| आज अचानक मन हुआ, दो व्यक्तियों की मित्रता की तुलना करने का| यद्यपि इनमें से एक को तो हम ईश्वर का दर्जा देते … Read more

बतावत आपनो नाम सुदामा!

नरोत्तम दास जी द्वारा लिखित ‘सुदामा चरित’ का प्रसंग आज याद आ रहा है| बचपन में अपनी पाठ्य पुस्तकों में हम यह प्रसंग पढ़ चुके हैं| शायद यह भी सही है कि उस समय हमारा मन इतना पवित्र होता है कि इस तरह के प्रसंग हमारे कोमल मन में गहरा स्थान बना लेते हैं| ऐसे … Read more

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