चालें बदल के देखते हैं!

न तुझको मात हुई है न मुझको मात हुई,
सो अब के दोनों ही चालें बदल के देखते हैं|

अहमद फ़राज़

बाज़ी बिछी है और मैं हूं!

मुक़ाबिल अपने कोई है ज़ुरूर कौन है वो,
बिसाते-दहर है, बाज़ी बिछी है और मैं हूं|

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

जो बिसाते-जाँ ही उलट गया!

जो बिसाते-जाँ ही उलट गया, वो जो रास्ते से पलट गया,
उसे रोकने से हुसूल क्या? उसे भूल जा…उसे भूल जा।

अमजद इस्लाम