सोचता हूँ के तुझे हाथ लगा कर देखूं !

आज एक बार फिर से मैं स्वर्गीय राहत इन्दौरी जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| राहत जी अपने सबसे अलग अंदाज़ ए बयां के लिए प्रसिद्ध थे| जो एक अलग प्रकार का ‘पंच’ उनकी रचनाओं में आता था वो पाठकों और श्रोताओं का मन मोह लेता था| लीजिए प्रस्तुत है राहत इन्दौरी साहब … Read more

अच्छा किया जो आपने सपने चुरा लिए!

स्वर्गीय डॉक्टर कुंवर बेचैन जी मेरे अग्रज और गुरु तुल्य रहे हैं| उनसे अनेक बार मिलने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर प्राप्त हुआ था| बहुत सहज और सरल हृदय इंसान और सृजनशील गीतकार थे| लीजिए आज प्रस्तुत है डॉक्टर कुंवर बेचैन जी की एक – दो चार बार हम जो कभी हँस-हँसा लिए,सारे … Read more

जैसे नाम तुम्हारा दिन!

आज मैं एक बार फिर सूर्यभानु गुप्त जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| वैसे तो ग़ज़ल लिखने वाले बहुत सारे हैं, लेकिन कुछ होते हैं जो अपने अलग किस्म के मुहावरे, अभिव्यक्ति के सौन्दर्य के कारण पहचाने जाते हैं, सूर्यभानु गुप्त जी भी उनमें शामिल हैं| उनके कुछ शेर जो मुझे अक्सर याद … Read more

मगर वो कोई फ़ैसला तो सुना दें!

ज़नाब सुदर्शन फ़ाक़िर साहब एक श्रेष्ठ शायर रहे हैं, उनके बहुत सुंदर गीत, ग़ज़लें आदि विभिन्न गायकों ने गायी हैं| वैसे कवि शायर आदि भी अजीब लोग होते हैं, एक मामूली सी अदा के लिए वे कुछ भी कुर्बान करने को तैयार हो जाते हैं, कम से कम कविता और शायरी में तो ऐसा ही … Read more

इससे पहले कि बेवफा हो जाएं !

आज एक बार फिर मैं भारतीय उपमहाद्वीप के बहुत विख्यात शायर अहमद फराज़ साहब की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| फराज़ साहब अपने अंदाज़ ए बयां और बेहतरीन ग़ज़लों के लिए जाने जाते थे और वे पाकिस्तान के संभवतः सबसे प्रसिद्ध शायरों में शामिल थे| लीजिए आज फराज़ साहब की इस ग़ज़ल का आनंद … Read more

लेकिन मकाँ नहीं मिलता!

निदा फ़ाज़ली साहब मेरे अत्यंत प्रिय शायर रहे हैं| उनमें कवि-शायर और संत, सबके गुण शामिल थे| क्या दोहे, क्या ग़ज़लें और क्या गीत, हर जगह उन्होंने अपना कमाल दिखाया था| उनकी प्रमुख विशेषता थी सरल भाषा में गहरी बात कहना| लीजिए आज निदा फ़ाज़ली साहब की इस ग़ज़ल का आनंद लीजिए- कभी किसी को … Read more

वो ज़माना याद है!

हसरत मोहानी जी की एक ग़ज़ल के कुछ शेर आज शेयर कर रहा हूँ| इस ग़ज़ल के कुछ शेर ग़ुलाम अली जी ने भी गाए थे| ग़ुलाम अली साहब की आवाज़ में इस ग़ज़ल का फिल्म- ‘निकाह’ में बड़ा खूबसूरत इस्तेमाल किया गया है| लीजिए आज हसरत मोहानी जी की इस ग़ज़ल का आनंद लीजिए- … Read more

चांद पागल है!

आज राहत इन्दौरी जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ, राहत साहब की शायरी में अक्सर एक ‘पंच’ होता है जो अचानक श्रोताओं को अपनी ओर खींच लेता है, कोई ऐसी बात जिसकी हम सामान्यतः कविता / शायरी में उम्मीद नहीं करते, जैसे आज की इस ग़ज़ल में ही- ‘चांद पागल है, अंधेरे की … Read more

विषबुझे खंजर न फेंक!

आज एक बार फिर से मैं अपने अग्रज और मेरे लिए गुरुतुल्य रहे श्रेष्ठ नवगीत एवं ग़ज़ल लेखक स्वर्गीय डॉक्टर कुँवर बेचैन जी की एक खूबसूरत ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ| लीजिए प्रस्तुत है डॉक्टर कुँवर बेचैन जी की यह ग़ज़ल – दो दिलों के दरमियाँ दीवार-सा अंतर न फेंक,चहचहाती बुलबुलों पर विषबुझे खंजर न … Read more

बुनियाद हिलनी चाहिए!

स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की कुछ रचनाएं मैं पहले शेयर कर चुका हूँ| दुष्यंत कुमार जी हिन्दी के प्रमुख कवियों में शामिल थे, परंतु उनको विशेष रूप से प्रसिद्धि मिली थी आपातकाल में प्रकाशित उनकी विद्रोह के स्वर गुंजाने वाली ग़ज़लों से, जिन्हें बाद में उनके ग़ज़ल संकलन ‘साये में धूप’ में संकलित किया गया| … Read more

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