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गति,अगति, सद्गति!

आज का समय मानव जाति के लिए बड़ा कठिन है, खास तौर पर कोरोना की यह दूसरी लहर भारतवर्ष के लिए बड़े कष्ट लेकर आई है| पहली लहर के समय हम कहते थे कि बाहर से लोगों को क्यों आने दे रहे हैं! आज दूसरे अनेक देश भारत से लोगों का वहाँ जाना प्रतिबंधित कर रहे हैं| इस महामारी का हम सबको मिलकर मुक़ाबला करना है, मैं तो कम से कम उन लोगों में से नहीं हूँ जो इस स्थिति के लिए भी किसी एक व्यक्ति को दोष देकर मुक्त हो जाएँ|

जिस गति से आज कोरोना फैल रहा है, उस पर शीघ्र नियंत्रण किया जाना आवश्यक और मुझे उम्मीद है कि एक संकल्प-बद्ध राष्ट्र के रूप में हम ऐसा करने में सफल होंगे|


असल में, मैं स्वयं को इतना कुशल नहीं मानता कि कोरोना के बारे में कोई उपयोगी सलाह दे सकूँ, वैसे हमारे यहाँ हर घर में ऐसे लोग मिल जाएंगे जो कोरोना को दूर भगाने के कारगर घरेलू नुस्खे बता सकते हैं, परंतु जब उनके किसी अपने को यह रोग लग जाता है, तब वे शांत हो जाते हैं|


खैर आज मैं गति को लेकर कुछ बात करना चाह रहा था| गोवा में हम जिस सोसायटी में रहते हैं, उसमें सभी 6 मंजिला इमारतें हैं, गोवा में शायद सामान्यतः इतनी मंज़िलें बनाने की अनुमति है| और हम छठी मंज़िल पर रहते हैं| अपनी लिफ्ट का इस्तेमाल करते समय अक्सर मुझे ऐसा लगता है कि अपनी यह लिफ्ट दिल्ली मैट्रो की तरह चलती है| जी हाँ, जितने समय में दिल्ली मैट्रो एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक पहुँचती है, उतने समय में अपनी यह लिफ्ट, एक फ्लोर से दूसरे फ्लोर पर पहुँचती है| मैं यही सोचता हूँ कि अगर अपनी बिल्डिंग 20-25 या इससे अधिक फ्लोर वाली होती तो हमें दिल्ली कि एक मैट्रो लाइन- ग्रीन, ब्लू या किसी पर भी पूरी यात्रा का आनंद मिल जाता| अब थोड़ी-बहुत अतिशयोक्ति की तो आप मुझे अनुमति देंगे ही न!

आज कोरोना के इस माहौल में बंबई (मुंबई) की हालत सबसे ज्यादा खराब है, और पूरे देश से वहाँ श्रमिक अपनी ज़िंदगी बनाने के लिए जाते हैं| ऐसे में एक पुराना गाना, नए संदर्भ में याद आता है-

ऐ दिल, मुश्किल-जीना यहाँ,

जरा हटके, जरा बचके, ये है बंबई मेरी जान|


वैसे भी कोरोना ने हमारी ज़िंदगी की गति की ऐसी की तैसी कर रखी है, ऐसे ही मन हुआ कि अपनी इस लिफ्ट के बहाने किसी ओर तरफ ध्यान दिया जाए, वैसे जो चुनौती आज हम सबके सामने है, उससे तो हमको मिलकर निपटना ही है|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|


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पेलोलिम- गोवा की एक खूबसूरत ‘बीच’!

गोवा में रहते हुए कई वर्ष बीत चले, जब लोग यहाँ बाहर से घूमने के लिए आते हैं, तब उनका लक्ष्य होता है कि सीमित समय में जितना हो सकता है, उतना गोवा देख लें| मुख्य आकर्षण तो यहाँ के समुद्र-तट, यहाँ की खूबसूरत ‘बीच’ ही हैं, कुछ पुराने चर्च, फोर्ट आदि हैं, जहां फिल्मों की शूटिंग भी होती रहती है|

जैसा मैंने पहले भी बताया है, मेरे घर के सामने ही ‘मीरामार बीच’ का इलाका है, बॉल्कनी से ही ‘बीच’ दिखाई देती है और वहाँ जाने के लिए बस सड़क पार करनी होती है, बाईं तरफ बढ़ जाओ तो ‘दोना पावला व्यू पाइंट’, जिसे ‘लवर्स पाइंट’ भी बोलते हैं और दाहिनी तरफ जाने पर ‘मीरामार बीच’| मेरी शाम की सैर ‘बीच’ के साथ-साथ ही होती है| बहुत अच्छा लगता है जब लोगों को अपनी फोटो में शाम के डूबते सूरज को ‘ट्रिक’ से अपनी मुट्ठी में कैद करने अथवा हथेली पर रखने का उपक्रम करते देखता हूँ, और फोन पर उत्साह से यह बताते हुए सुनता हूँ, ‘मैं अभी मीरामार बीच पर हूँ’|

खैर क्योंकि अब गोवा में ही हूँ, इसलिए कोई जल्दी नहीं रहती सभी जगहों को देखने का टार्गेट पूरा करने की| क्योंकि पणजी में ही हूँ, तो यहाँ का चर्च, बाज़ार, कला अकादमी आदि तो देखते ही रहते हैं| आधा गोवा तो हमने परिवार के साथ बाहर ‘डिनर’ करने के क्रम में देख लिया है| बच्चों को इस बात की जानकारी रहती है कि आजकल कहाँ अच्छा खाना और सर्विस मिलती है|

अब मैं आज के इस आलेख के मुख्य विषय पर आता हूँ| जैसे मीरामर, केलेंगुट, वाघा आदि बहुत सी बीच तो हम गाड़ी में घूमते हुए पहले ही देख आए हैं| पिछले माह हम उत्तरी गोवा में ‘आरंबोल’ बीच गए थे, जो बहुत खूबसूरत बीच मानी जाती है, वहाँ हमने दो दिन का प्रवास किया था और वह बहुत अच्छा अनुभव रहा था|

इस बार हमारा प्रोग्राम बना दक्षिणी गोवा में ‘पेलोलिम’ बीच जाने का, जिसके बारे में मेरे बेटे ने बताया कि यह गोवा की सबसे खूबसूरत ‘बीच’ है| मैं यह भी बता दूँ कि हम गोवा में पिछले 3-4 वर्ष से हैं लेकिन मेरे बेटे यहाँ आने से पहले ही गोवा को खंगाल चुके थे|

हाँ तो, ‘पेलोलिम’ बीच के बगल में ही रुकने के लिए ‘आर्ट रिज़ॉर्ट’ है जिसमें बहुत खूबसूरत तरीके से समुद्र के किनारे ही ‘कॉटेज’ बनाए गए हैं और पेंटिंग्स का डिस्प्ले आदि, सभी कुछ अत्यंत सुरुचिपूर्ण है|

इन स्थानों की प्राकृतिक सुंदरता तो देखने और अनुभव करने के लिए ही होती हैं, मैं इनका वर्णन क्या कर पाऊँगा, लोगों ने यहाँ समुद्र में बैठक करने का खूब आनंद लिया और बोटिंग के लिए आसपास के कुछ स्थलों को भी देखा, जिनमें ‘बटरफ्लाई बीच’, ‘हनीमून बीच’ आदि शामिल हैं| एक अनुभव जो अब तक नहीं हो पाया था, वह है बोटिंग के दौरान ‘डॉल्फ़िंस’ को देखने का, इससे पहले कई स्थानों पर हम गए थे, परंतु नहीं देख पाए थे, यहाँ उनको भी देख लिया, यद्यपि उनके शरीर का कुछ भाग ही पानी से बाहर निकलते हुए देखा, परंतु अनेक बार देखा| ऐसा लगता है कि ‘डॉल्फ़िंस’ के कुछ परिवार उस क्षेत्र में थे|



कुल मिलाकर ‘पेलोलिम’ बीच पर दो दिन का यह प्रवास बहुत अच्छा अनुभव रहा और गोवा ‘विजिट’ पर आने वाले साथी इसको भी अपने गंतव्य स्थलों में शामिल कर सकते हैं और चाहें तो कुछ दिन यहाँ बिता सकते हैं|
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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पंजिम, मांडवी नदी और मीरामार!

आज फिर से पुरानी पोस्ट का दिन है, लीजिए मैं अपनी एक पुरानी पोस्ट, फिर से शेयर कर रहा हूँ|


पिछले दिनों मैंने देश-विदेश के कुछ स्थानों के भ्रमण पर आधारित ब्लॉग लिखे, जिनका प्रारंभ मैंने लंदन से किया था और इस बात को भी रेखांकित किया था कि लंदन के जीवन में थेम्स नदी की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका है!


मैं पिछले कई वर्षों से गोआ के, पंजिम में रह रहा हूँ और अभी तक यहाँ से संबंधित कोई ब्लॉग पोस्ट नहीं लिखी है। इसका कारण यह भी है कि गोआ वैसे ही ट्रैवेल ब्लॉगर्स का हॉट फेवरिट है, बहुत ब्लॉग लिखे जाते हैं, यहाँ के बारे में। मेरा भी जब मन होगा, जब एक टूरिस्ट की तरह गोआ घूमूंगा तब शायद यहाँ के स्थानों के बारे में ट्रैवल ब्लॉग लिखूंगा। आज पंजिम, मीरामार और मांडवी नदी के बारे में बात कर लेता हूँ, जहाँ मुझे एक टूरिस्ट के रूप में नहीं बल्कि सामान्यतः कुछ कामों के लिए जाना पड़ता है।

जैसे नदी अथवा समुद्र वाले टूरिस्ट स्पॉट्स में सामान्यतः होता है, नाव अथवा शिप में यात्रा करना वहाँ की एक प्रमुख गतिविधि होती है, वह गोआ में, पंजिम में भी है। इसके अलावा यहाँ एक तरह से कई द्वीप हैं और कुछ स्थानों पर जाने के लिए सड़क मार्ग के मुकाबले जलमार्ग से जल्दी पहुंचा जा सकता है। गोआ में शिप में और अन्यत्र चलने वाले कैसिनो भी काफी लोकप्रिय हैं। वैसे यहीं के निवासी होने के नाते हम किसी विशेष अवसर पर अक्सर, सी-बीच पर स्थित किसी रेस्टोरेंट में भोजन के लिए चले जाते हैं।


अपने क्षेत्र पंजिम, गोआ के बारे में आज बात करते हुए आइए हम, पंजिम बस स्टैंड से मांडवी नदी के साथ-साथ मीरामार बीच की तरफ आगे बढ़ते हैं, मांडवी नदी का काफी चौड़ा पाट, समुद्र जैसा ही स्वरूप दिखाता है, नदी का नजारा वास्तव में देखने लायक है, इसमें अनेक आकर्षक नौकाएं और शिप दिखाई देते हैं, जिनमें चलने वाले कैसिनो भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। थोड़ा आगे बढ़ने पर, कंपाल में गोआ वन विभाग द्वारा विकसित किया गया विशाल पार्क है, जहाँ टूरिस्ट लोग विश्राम कर सकते हैं और प्राकृतिक छटाओं को निहार सकते हैं। इसके बाद नदी के किनारे पर ही ‘कला अकादमी’ का विशाल भवन है, जो एक बड़ा आकर्षण का केंद्र है, यहाँ सांस्कृतिक गतिविधियां चलती रहती हैं। जिनमें जहाँ हल्के-फुल्के नाटक होते हैं, वहीं गंभीर प्रस्तुतियां भी होती हैं। इस संस्थान के बारे में मौका मिलेगा तो बाद में विस्तार से लिखूंगा।


यहाँ से कुछ दूर आगे चलने पर हम मीरामार बीच पर पहुंच जाते हैं, जो काफी टूरिस्टों को आकर्षित करती है, विशेष रूप से इस बीच के बाहर चौपाटी है, जैसे मुंबई में है, शायद सभी जगह समुद्र के पास टूरिस्टों को खाने-पीने का आकर्षण प्रदान करने के लिए होती हो, यहाँ विशेष रूप से रात में बहुत भीड़ होती है, जब टूरिस्ट लोग दिन भर की भागदौड़ के बाद चटपटे व्यंजनों तथा आइस-क्रीम और कुल्फी का आनंद लेते हैं। (वैसे फिलहाल चौपाटी की गतिविधियां बंद हैं, शायद बाद में कुछ नया निर्माण होने के बाद यह फिर से चालू होगी|)इससे कुछ दूर जाने पर दोना-पाओला का व्यू पाइंट भी एक आकर्षण का केंद्र है।
पंजिम, मांडवी नदी और मीरमार बीच के बारे में, आज इतना ही।


नमस्कार।
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