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अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव में -‘ताशकंद फाइल्स’

पणजी, गोवा में चल रहे 50 वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव, आईएफएफआई-2019 का 28 नवंबर को समापन हो गया। ‘IFFI@50’ में फिल्मों के शौकीन लोगों को अनेक श्रेष्ठ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्में देखने को मिलीं।

 

इसी क्रम की एक कड़ी के रूप में प्रोड्यूसर शरद पटेल की फिल्म ‘ताशकंद फाइल्स’ को इस समारोह में काफी प्रशंसा प्राप्त हुई।

शरद पटेल की इस फिल्म को 50वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव में विशेष प्रदर्शन के लिए आमंत्रित किया गया था। फिल्म का यह प्रदर्शन ‘हाउस फुल’ रहा और दर्शकों ने फिल्म को काफी सराहा। यह फिल्म वर्ष 2019 की सफलतम फिल्मों की श्रेणी में शामिल है।

यह फिल्म अप्रैल 2019 में रिलीज़ हुई थी तथा भारतवर्ष में और विदेशी छविगृहों में यह लगातार 100 दिनों तक प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म को अभी भी, आईएफएआई-2019 के दौरान प्रदर्शित किए जाने पर दर्शकों से बहुत सराहना प्राप्त हुई। श्री शरद पटेल दर्शकों के इस उत्साह को देखकर भावविभोर हो गए और उन्होंने कहा कि अच्छा होता कि फिल्म की पूरी टीम इस अवसर पर उपस्थित होती और इस रिस्पांस का आनंद लेती।

 

 

श्री शरद पटेल एसपी सिनेकॉर्प के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं और उन्होंने कुछ ऐसी फिल्में प्रोड्यूस की हैं जिनको बहुत प्रशंसा प्राप्त हुई है, जैसे ‘बुद्धा इन ट्रैफिक जाम’, और अत्यंत सफल गुजराती फिल्म- ‘छेल्लो दिवस’, वे हाल ही में अपनी नए गुजराती प्रोडक्शन ‘विक्किडा नो वर्घोडो’ के लिए चर्चा में रहे हैं, जिसमें गुजराती फिल्मों के सुपरस्टार मल्हार ठक्कर नायक की भूमिका निभा रहे हैं और राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त निर्देशक द्वय- राहुल भोले और विनीत कनौजिया इसका निर्देशन कर रहे हैं।

इस रिपोर्ट का विवरण तथा चित्र- बॉलीवुड प्रैस एंड मीडिया फोटोग्राफर- श्री अली कबीर (कबीर एम. लव) के सौजन्य से।

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार।

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अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव के अवसर पर पणजी, गोवा में सजावट

 

पणजी, गोवा में चल रहे 50 वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव, आईएफएफआई-2019 का आज 28 नवंबर को अंतिम दिन है। ‘IFFI@50’ में फिल्म के शौकीन लोगों को अनेक श्रेष्ठ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्में देखने को मिलीं।

 

 

इस अवसर पर पणजी, गोवा में आने वाले मेहमानों को लुभाने और इस अवसर को सेलीब्रेट करने के लिए बहुत सुंदर सजावट की जाती है, जिसमें इस उत्सव के प्रतीक ‘गोल्डन पीकॉक’ को अनेक स्थानों पर लगाया जाना, अनेक स्थानों पर ‘ओपन एयर फिल्म शो’ आयोजित किया जाना, सड़क के किनारे कलाकारों की प्रस्तुतियां, कलाकृतियों के स्टॉल आदि लगाया जाना भी शामिल होता है।

इस अवसर पर कला अकादमी और ‘आइनॉक्स थियेटर’ को भी आकर्षक ढंग से सजाया गया था।

 

वैसे तो बहुत कुछ है जो शेयर किया जा सकता है, बस दो चित्र और,

 

आज बस इस अवसर पर की गई सजावट की कुछ झलकियां प्रस्तुत कर रहा हूँ।

नमस्कार।

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फिल्म उत्सव, आईएफएफआई-2019 में आज

पणजी, गोवा में चल रहे 50 वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव, आईएफएफआई-2019 में आज 23 नवंबर की खबर यह है कि फिल्म स्टार श्री अनिल कपूर आज कला अकादमी के निकट इंटरएक्टिव डिजिटल एग्जिबिशन ‘IFFI@50’ देखने के लिए गए। प्रस्तुत हैं इस अवसर के कुछ चित्र।

चित्र और विवरण बॉलीवुड प्रेस/मीडिया फोटोग्राफर- श्री कबीर अली (कबीर एम. लव) के सौजन्य से।

नमस्कार।

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पणजी में फिल्म मेले- आईएफएफआई-2019 का दूसरा दिन

एक बार फिर से गोवा फिल्म फेस्टिवल, IFFI-2019 के बारे में लिख रहा हूँ, क्योंकि यह मेरा स्थान है और अपने निवास क्षेत्र के बारे में ऐसी गौरव भरी बात लिखना अच्छा लगता है।

 

जैसा मैंने अपनी पिछली पोस्ट में लिखा था, आजकल पणजी, गोवा में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव, आईएफएफआई-2019 चल रहा है। इस उत्सव के उद्घाटन समारोह के बारे में मैंने अपनी पिछली पोस्ट में लिखा था, अब इसी उत्सव से संबंधित कुछ और जानकारी दे रहा हूँ।

एशिया के इस सबसे बड़े फिल्म समारोह के 50वें आयोजन में, जैसी कि घोषणा की गई थी, देश के सर्वमान्य सुपर स्टार, दादासाहब फाल्के सम्मान तथा अन्य अनेकानेक पुरस्कारों से अलंकृत, हिंदी फिल्म जगत के गौरव- श्री अमिताभ बच्चन की फिल्मी यात्रा की उनकी फिल्मों के माध्यम से प्रस्तुति अर्थात- रैट्रोस्पेक्टिव आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन पणजी की कला-अकादमी में किया जा रहा है, इसमें अमिताभ जी की अनेक प्रतिनिधि फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी।

 

 

श्री अमिताभ बच्चन ने कल कला अकादमी, पणजी, गोवा में  रैट्रोस्पेक्टिव का उद्घाटन किया। इस अवसर बोलते हुए श्री बच्चन ने कहा – मैं अत्यंत अभिभूत हूँ और भारत सरकार को इसके हृदय से लिए धन्यवाद देता हूँ। मैं ऐसा महसूस करता हूँ कि मैं इस सम्मान के योग्य नहीं हूँ, लेकिन मैं विनम्रतापूर्वक इसे स्वीकार करता हूँ।

इस फिल्म उत्सव के 50 वें आयोजन के अवसर पर उन्होंने कहा, “मैं भारत सरकार को यह आयोजन इतनी भव्यता के साथ करने के लिए बधाई देता हूँ। प्रतिवर्ष हम पाते हैं कि इसमें भाग लेने वाले प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ती जाती है और एक साथ हमें अनेक प्रकार की फिल्में मिलती हैं, जिससे हम विश्व भर की सृजनात्मक फिल्मों में से अपने देखने के लिए कुछ फिल्में चुन सकते हैं।”

श्री बच्चन ने कहा कि फिल्मों की दुनिया विश्व व्यापी है और यह भाषा और क्षेत्र के बंधन तोड़ देती हैं। उन्होंने कहा कि जब हम सिनेमा हॉल में बैठते हैं तब हम अपनी बगल में बैठे किसी व्यक्ति की जाति, धर्म, रंग नहीं पूछते हैं। हम सब उसी फिल्म का एक साथ आनंद लेते हैं, उस फिल्म के दृश्यों को देखकर एक साथ हंसते हैं और एक साथ रोते हैं, एक जैसी भावनाएं व्यक्त करते हैं। यह एक अत्यंत सशक्त माध्यम है और उन्होंने आशा व्यक्त की यह माध्यम पूरी निष्ठा से अपना काम करता रहेगा।

उन्होंने एक शांतिपूर्ण और प्रेम से भरी दुनिया बनाए रखने के लिए फिल्मों की भूमिका का उल्लेख किया और आशा व्यक्त की कि वे अपनी इस भूमिका को निरंतर निभाती रहेंगी।

श्री बच्चन का गोवा से खासा जुड़ाव रहा है और उन्होंने बताया कि किस प्रकार उनकी पहली फिल्म की शूटिंग भी गोवा में हुई थी। उन्होंने कहा कि गोवा आने पर उनको हमेशा ऐसा लगता है जैसे वे अपने घर आये हों। ‘यहाँ मुझे अनेक अवसर मिले हैं और लोगों का बहुत प्यार मिला है’, उन्होंने कहा।

श्री बच्चन की फिल्मों के रैट्रोस्पेक्टिव के अंतर्गत जो फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी उनमें- ‘पा’, शोले, दीवार, ब्लैक, पीकू और बदला शामिल हैं।

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इसके बाद मैं यहाँ समारोह में प्रदर्शित की जा रही एक फिल्म ‘दा हंड्रेड बक्स’ की संक्षिप्त जानकारी दे रहा हूँ।

 

 

यह मोहिनी की कहानी है, मोहिनी और उसके ऑटो चालक अब्दुल की यह एक रात की कहानी पैसे के लिए ग्राहक खोजने में पूरी रात के उनके संघर्ष को प्रदर्शित करती है । आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिल्म के निर्देशक- दुष्यंत सिंह, जो एक संगीतकार और गायक भी हैं, ने बताया कि यह फिल्म एक बहुत ही संवेदनशील विषय ‘वेश्यावृत्ति’ पर आधारित है, जिसे अक्सर दुनिया के सबसे पुराने पेशे के रूप में वर्णित किया जाता है, लेकिन समाज ने हमेशा वेश्याओं का अपमान किया है। फिल्म जनवरी 2020 में रिलीज़ होगी और पूरे भारत में प्रदर्शित की जाएगी। फिल्म में पहली बार किसी अभिनेत्री ने इस विषय में एक शक्तिशाली प्रस्तुति दी है।

 

फिल्म की अभिनेत्री कविता जो एक मॉडल है ने बताया कि यह एक अभिनेत्री के रूप में उनकी पहली फिल्म है और करियर की शुरुआत में उन्हे मुख्य किरदार के रूप में एक फिल्म मिली और यह फिल्म महिला प्रधान है । आमतौर पर यह एक पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं की स्थितियों को चित्रित करती है। क्योंकि यह फिल्म उद्योग में उसकी शुरुआत है और इस तरह की भूमिका!  एक लड़की होना मेरे लिए भी सौभाग्य की बात है। कविता के अनुसार, निर्देशक दुष्यंत एक अद्भुत निर्देशक हैं और उनके साथ मेरे लिए एक अभिनेत्री के रूप में काम करना बहुत अच्छा है क्योंकि वह एक परिवार की तरह सभी के साथ व्यवहार करते हैं। यह एक कलाकार के रूप में उनके साथ काम करने के लिए बहुत आभारी हैं। फिल्म के निर्माता रजनीश राम पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मुझे फिल्म का विषय पसंद आया! इतना कि एक निर्माता के रूप में मैंने तुरंत हां कह दिया क्योंकि ऐसी चीजें और विषय मिलना मुश्किल है जो महिलाओं के दर्द और संघर्ष को इतनी खूबसूरती से बयान कर सकते हैं। मेरे अनुसार फिल्म से जुड़े सभी अभिनेताओं और तकनीशियनों ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। दुष्यंत सिंह के साथ अपनी पुरानी दोस्ती के कारण  एक निर्देशक के रूप में उनसे अच्छा तालमेल रहा और फिल्म में एक अभिनेत्री के रूप में कविता के अभिनय से भी बहुत प्रभावित हुए हैं क्योंकि उनकी कड़ी मेहनत के कारण यह अनुमान लगाना कठिन है कि यह उनकी  पहली फिल्म है,  उन्होंने अपना किरदार इतनी अच्छी तरह से निभाया। निर्देशक दुष्यंत सिंह ने फिल्म के अन्य पात्रों के बारे में बताया जो दिनेश बावरा (अभिनेता और हास्य कवि), ज़ैद शेख – अभिनेता हैं। निशा गुप्ता अभिनेत्री ने फिल्म में शानदार काम किया है। चूंकि पूरी फिल्म रात में ही शूट की गई थी, इसलिए फिल्म का पूरा लुक बहुत यथार्थवादी लग रहा है, फिल्म में संगीत संतोष सिंह का है। फिल्म की पटकथा सलीम द्वारा लिखी गई है। फिल्म के अन्य निर्मा सहायक संदीप पुरी, विभव तोमर, प्रतिमा तोतला और रितु सिंह हैं।

 

 

इस आलेख के साथ दिए गए सभी छायाचित्र तथा विवरण बॉलीवुड के फोटोग्राफर श्री कबीर अली (कबीर एम. लव) के सौजन्य से।

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार।

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गोवा का वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय फिल्म मेला- IFFI 2019

गोवा भारत का एक प्रमुख पर्यटन केंद्र है, जहाँ देश-विदेश से सैलानी आकर्षक समुद्र-तटों को देखने और प्रदूषण मुक्त वातावरण में फुर्सत के कुछ पल बिताने के लिए आते हैं। विशेष रूप से जब देश के अनेक भागों में सर्दी पड़ रही होती है तब भी यहाँ पर मौसम सुहाना होता है। इस प्रकार के पर्यटन स्थलों पर सैलानियों को कुछ और गतिविधियां भी आकर्षित करती हैं। गोवा के मामले में ऐसी ही एक गतिविधि है अंतर्राष्ट्रीय फिल्म मेला अर्थात IFFI, जिसका कल 20 नवंबर को उद्घाटन हुआ।

 

 

आईएफएफआई-2019 का उद्घाटन कल पणजी, गोवा में बड़ी धूमधाम के साथ हुआ। इस फिल्म मेले के स्वर्ण जयंती समारोह का उद्घाटन केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री- श्री प्रकाश जावड़ेकर ने सिनेमा जगत की दो महान हस्तियों- श्री अमिताभ बच्चन और श्री रजनीकांत की गौरवशाली उपस्थिति में किया, जिनको फिल्म जगत में एक लंबी पारी पूरी करने के अवसर पर सम्मानित भी किया गया। अमिताभ बच्चन जी ने अपने फिल्मी करियर के 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं और श्री रजनीकांत भी लगभग इतने ही समय से लोगों को अपने अभिनय से चमत्कृत कर रहे हैं।

 

नौ दिन तक चलने वाले इस समारोह में 76 देशों की 200 से अधिक फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी तथा सिनेमा प्रेमियों के लिए अपनी रुचि के अनुसार श्रेष्ठतम फिल्में देखने का यह सुनहरा अवसर है। इस बार के फिल्म मेले में रूसी फिल्मों को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जा रहा है।

 

 

इस फिल्म मेले के भव्य उद्घाटन समारोह का संचालन, श्री अमिताभ बच्चन और श्री रजनीकांत जैसी दिव्य हस्तियों की उपस्थिति में प्रमुख फिल्मी व्यक्तित्व श्री करन जौहर ने किया, और इन विशिष्ट अतिथियों द्वारा केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री- श्री प्रकाश जावड़ेकर के साथ मिलकर, इस समारोह के प्रारंभ की घोषणा की गई।

 

 

इस समारोह में श्री रजनीकांत को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए एक विशेष पुरस्कार ‘आइकन ऑफ गोल्डन जुबिली एवार्ड’ से सम्मानित किया गया, जो इस 50 वें फिल्म उत्सव से ही प्रारंभ किया गया है। अपने योगदान से फ्रेंच सिनेमा की पहचान बन चुकी अभिनेत्री- सुश्री इसाबेले अन्ने मेडेलीने हुपर्ट को इस अवसर पर ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट एवार्ड’ प्रदान किया गया।

 

 

इस अवसर पर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री- श्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ऐसा वातावरण तैयार किया जा रहा है कि अधिक से अधिक विदेशी निर्माता, बिना किसी असुविधा के भारत में अपनी फिल्मों की शूटिंग कर पाएं और इस प्रकार हमारे देश का प्रकृतिक सौंदर्य पूरी दुनिया तक पहुंचे। अब उन निर्माताओं को एक बिंदु से ही शूटिंग की अनुमति मिल पाएगी और अनेक स्थानों पर नहीं भटकना पड़ेगा। इस प्रकार उन निर्माताओं को भी आसानी होगी और गोवा, लेह-लद्दाख, अंडमान निकोबार जैसे स्थानों को भी इसका लाभ मिलेगा।

 

 

मंत्री जी ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी, संगीत तथा फिल्में हमारी मृदुल शक्ति हैं और हमें इनको आगे बढ़ाना चाहिए। हर फिल्मी चरित्र हमारे मस्तिष्क पर लंबे समय तक बनी रहने वाली छाप छोड़ता है और उसमें हमारे विचार तथा हमारा मूड बदलने की शक्ति होती है। उन्होंने कहा कि भारतीय फिल्मों के दर्शक लगातार बढ़ रहे हैं और आज दुनिया भर में भारतीय फिल्में देखी जाती हैं। मंत्री जी ने कहा कि इस समारोह में दुनिया भर की अनेक अच्छी फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी और यह गोवा के पूर मुख्यमंत्री स्व. मनोहर पर्रिकर जी के प्रति हमारी विनम्र श्रद्धांजलि होगी।

 

 

श्री रजनीकांत जी ने ‘आइकन ऑफ गोल्डन जुबिली एवार्ड’ स्वीकार करते हुए, श्री अमिताभ बच्चन जी के कर कमलों से यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने यह पुरस्कार उन सभी निर्माताओं, निर्देशकों और तकनीशियनों को समर्पित किया, जिनके साथ उन्होंने फिल्मों मे काम किया है तथा अपने प्रशंसकों के प्रति आभार व्यक्त किया ।

श्री अमिताभ बच्चन ने अपना सम्मान किए जाने पर हार्दिक आभार व्यक्त किया और कहा कि वे आईएफएफआई के बहुत आभारी हैं  कि उनका सम्मान किया गया और उनकी फिल्मों का विशेष प्रदर्शन किया जा रहा है। श्री अमिताभ बच्चन ने यह भी कहा कि आज फिल्में हमारे जीवन का अटूट हिस्सा बन गई हैं। गोवा में इतना विशाल फिल्म उत्सव आयोजित होने से गोवा दुनिया भर में हो रही गतिविधियों की झलक मिलती है और उनको बाहर के लोगों से मिलने-जुलने का अवसर मिलता है।

 

 

सूचना एवं प्रसारण सचिव श्री अमित खरे ने इस समारोह की प्रमुख विशेषताओं की जानकारी दी और यह बताया कि 1952 में जहाँ इसमें 23 देशों ने भाग लिया था, इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 76 हो गई है।

गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन में हर प्रकार की फिल्में शामिल हैं और यह समारोह भारतीय और विदेशी निर्माताओं, कलाकारों को एक-दूसरे के निकट लाता है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि फिल्में समाज के दर्पण के रूप में काम करती हैं।

इस समारोह शामिल हुए कुछ प्रमुख व्यक्ति हैं- विश्व विख्यात सिनेमेटोग्राफर और आईएफएफआई इंटरनेशनल जूरी चेयरमैन- जॉन बेली, भारतीय फिल्म निर्माता और भारतीय जूरी के अध्यक्ष- श्री प्रियदर्शन और अन्य जूरी सदस्य, रूसी प्रतिनिधिमंडल की प्रामुख- मारिया लेमेशेवा और अन्य अनेक गणमान्य अतिथि इस समारोह में शामिल हुए।

इस आयोजन में इन फिल्म समारोहों को गोवा की पहचान बनाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री स्व. मनोहर पर्रिकर को, उनके योगदान को रेखांकित करने वाली एक लघुफिल्म के माध्यम से भावभीनी श्रंद्धांजलि दी गई। इस आयोजन में जिन प्रमुख भारतीय फिल्मी हस्तियों को सम्मानित किया गया उनमें श्री रमेश सिप्पी, श्री एन. चंद्रा, श्री पी.सी.श्रीराम शामिल थे।

समारोह में शामिल कुछ प्रमुख व्यक्तियों में केंद्रीय आयुष मंत्री- श्री श्रीपद नायक, केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री- श्री बाबुल सुप्रियो, केंद्रीय फिल्म सर्टिफिकेशन बोर्ड के अध्यक्ष- श्री प्रसून जोशी आदि शामिल थे।

इस अवसर पर सूचना एवं प्रसारण मंत्री- श्री प्रकाश जावडेकर ने 50 वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह के अवसर पर एक डाक टिकट भी जारी की। उद्घाटन में अनेक भव्य प्रस्तुतियां की गईं, जिनमें विख्यात संगीतकार एवं गायक श्री शंकर महादेवन और उनके बैंड की प्रस्तुति ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

फिल्म-समारोह का प्रारंभ इटली की फिल्म ‘डिस्पाइट द फॉग’ (कोहरे के बावज़ूद) से हुआ। इस फिल्म से जुड़े कलाकार और अन्य कर्मी भी फिल्म प्रदर्शन के अवसर पर उपस्थित थे। आईएफएफआई के इस स्वर्ण जयंती उत्सव में लगभग 7000 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

इस आयोजन में 76 देशों की 200 से अधिक प्रतिष्ठित फिल्मों का प्रदर्शन होगा, रूस की फिल्मों पर इस समारोह में विशेष रूप से फोकस किया गया है और भारतीय पैनोरमा खंड में 15 नॉन-फीचर फिल्में भी प्रदर्शित की जाएंगी। ऐसी आशा की जाती है कि इस विशिष्ट समारोह में 10, 000 से अधिक सिनेमा प्रेमी भाग लेंगे और यह समारोह पणजी, गोवा में 28, नवंबर, 2019 को संपन्न होगा।
(उद्घाटन समारोह से संबंधित सभी छायाचित्र- बॉलीवुड फोटोग्राफर श्री कबीर अली (कबीर एम. लव के सौजन्य से)

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सूर्यास्त समुद्र किनारे का!

समुद्र किनारे से सूर्यास्त देखकर एक शेर याद आ रहा है, शायद मीना कुमारी का लिखा हुआ है-

 

 

ढूंढ़ते रह जाएंगे, साहिल पे कदमों के निशां,
रात के गहरे समंदर में उतर जाएगी शाम।

 

आज के लिए इतना ही।
नमस्कार।

 

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मीरामार बीच गोवा की एक शाम!

अन्य स्थानों पर भ्रमण का विवरण तो लिखते ही रहते हैं, आज गोवा में मीरामार बीच पर सूर्यास्त और शाम के समय के कुछ चित्र शेयर कर रहा हूँ। आशा है आपको पसंद आएंगे-

 

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।


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Tourism for prosperity or destruction!

Today I am discussing  a subject related to tourism. Tourism is a very big industry today in the entire world. There are some small countries having beautiful landscape, rivers, hills etc. where the biggest source of earning is related to tourism.

For tourists the whole country becomes a host, to serve them and earn good money in return, but the basic thing is that we should not become too greedy. It is the natural beauty of Kashmir because of which it is called ‘heaven on the earth’. And this is the reason why Pakistan which is a failed country otherwise, where the elected (?) representatives are always in the grip of military bosses and ISI,  they are so desperate to grab Kashmir from India, thinking that it might help them survive as a nation.

I have lived in cities like Delhi, Jaipur, Mumbai and presently in Goa, which are big tourist destinations. I remember about Jaipur, long back when I was living there I found that many houses in our neighborhood had been converted into hotels. In Goa also there are many people whose earnings are through houses either given to hotels or they are themselves operating them as guest houses.

In Goa since there are very less tourists during rainy season, the income of taxi operators is seasonal, this might be a reason that they never allowed App based taxi services like Ola , Uber to operate there and they charge almost double of the taxi fare charged at other places.

When tourists arrive at any place everybody in the market, who provides any type of facilities or services, get benefited. In any season if tourists do not arrive it is a great loss to government as well as the people connected with this activity.

I have not yet gone to Kashmir but I remember what my son told me after coming from there, there those who provide horse-riding services, they are poor people and solely depend on the earnings from tourists. They gather outside the hotels and when any tourist comes out several of them rush to catch the customer, they urge them to take a ride, say they are hungry and all that. Those opposing tourism, the separatists etc. had spoiled there life, I hope now slowly they would get benefited, since their earnings totally depend on tourists.

So no doubt that tourism is a big booster for the economy, but here we are discussing the bad effects of ‘over tourism’, yes it could be a big problem. We need to earn more but not at the cost of well being of our people. Some people connected with tourism might be getting the benefits from more and more rush of tourists but if it effects the environment or otherwise makes a negative impact on the quality of life there, it must be taken care of.

For reducing the negative impacts of over-tourism I think the facilities for stay of tourists can be spread in more area so that the density of population gets reduced. There could also be some mechanism to manage the rush for which tourists may be motivated to visit more in the periods when they visit less, so that it becomes less in peak season. Some facilities could be developed to make their stay in off-season more comfortable and cheaper.

Laws to maintain cleanliness and good environment, should be applied more strictly, those people who do such activities which harm the environment should get punished. No doubt tourism can become the backbone of any economy but this is not desirable at the cost of harming the environment and our social well being.

I think a more dependable and less polluting transport system, metro trains wherever possible can add to reduction of pollution by so many taxis and it would help the tourists also.

I do not know much about the factors badly affecting the environment or the social life but the local administration can properly assess them and make a proper plan to reduce the bad effects of more rush of tourists at any given time.

I talked about tourist destinations in India but at present I am in London, so I would put pics of London here.

This is my humble submission on the #IndiSpire prompt –

Over-tourism has led to social and environmental problems. What do you think is a good solution… #Tourism

Thanks for reading.

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70. अस्पताल की टूटी टांग!

आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है ये पुरानी ब्लॉग पोस्ट-
आज स्वास्थ्य और इस बहाने स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में बात करेंगे।

वैसे तो मुझे लगता है कि आज की तारीख में हिंदुस्तान में, और शायद दुनिया में, कोई बीमारी होनी ही नहीं चाहिए। अब लोग ‘फॉलो’ न करें तो अलग बात है वरना सोशल मीडिया पर, दुनिया में जितनी भी तक़लीफें या बीमारियां हैं, उनमें से प्रत्येक के लिए कम से कम दस इलाज तो सेवाभावी लोगों द्वारा दे दिए जाते हैं।

अब मैं अपनी सारी बीमारियों के बारे में तो चर्चा नहीं करूंगा, लेकिन एक बात है कि मेरा वज़न लगातार बढ़ता जा रहा है और शुगर की तकलीफ भी है, लेकिन मैं कितना अविश्वासी प्राणी हूँ कि हर दिन परोपकारी जीव, सोशल मीडिया पर ऐसे शर्तिया उपाय बताते हैं, जिनसे मोटापा तेज़ी से घटता है और आपका फैट, आइसक्रीम की तरह पिघल जाता है, शुगर जड़ से मिट जाती है, लेकिन मैंने शुरू में तो एक- दो उपाय आज़माए पर उसके बाद ऐसा करना बंद कर दिया। अब ऐसा थोड़े ही होता है, बाबा रामदेव भी कहते हैं कि करने से होगा! लेकिन दिक्कत ये है कि कंपीटीशन चल रहा है, इधर बीमारियां बढ़ रही हैं और उधर चौगुनी रफ्तार से, सोशल मीडिया पर उनके इलाज बढ़ रहे हैं।

सोशल मीडिया पर जो इलाज बताए जाते हैं, उनको अक्सर लोग बड़ी श्रद्धा से पढ़ते हैं, फिर बीमारियां और मोटापे जैसी सामान्य विकृतियां क्यों बढ़ती जा रही हैं।

बीमारी अपनी जगह है लेकिन मेरी डॉक्टरों और अस्पतालों में ज्यादा श्रद्धा नहीं रही है, जब मज़बूरी हो जाती है, सामान्यतः तभी मैं अस्पताल जाता हूँ। इससे पहले मैं गुड़गांव में था, जहाँ मेदांता, आर्टिमिस,पारस, फोर्टिस आदि अंतर्राष्ट्रीय स्तर के माने जाने वाले अस्पताल हैं, वहाँ डॉक्टरों की संख्या भी अच्छी खासी है, लेकिन उनके पास फुर्सत नहीं होती, लंबे इंतज़ार के बाद जब मरीज़ का नंबर आता है, तब वरिष्ठ चिकित्सक उससे कहते हैं कि वह जल्दी से अपनी तकलीफ बताए, जिससे वे यह तय कर सकें कि इसके कौन-कौन से टेस्ट किए जा सकते हैं, वरिष्ठ चिकित्सक महोदय के आस-पास कुछ शिष्य-शिष्याएं भी अक्सर बैठे रहते हैं, जिनको वे समझाते हैं कि रोगी को किस प्रकार टहलाना है।

अक्सर यह भी होता है कि पहले दौर के परीक्षणों के बाद उनको याद आता है कि कुछ और टेस्ट कराए जा सकते हैं, विशेष रूप से यदि उनको पता हो कि मरीज़ के इलाज का खर्च कोई माली कंपनी अथवा हेल्थ इंश्योरेंस वाले देखते हैं। मुझे याद है कि मैंने दो-तीन वर्ष पहले अपनी आंखों का केटेरेक्ट का ऑपरेशन, गुड़गांव के एक नेत्र-चिकित्सक से अपोलो में कराया, क्योंकि उन चिकित्सक के यहाँ ऑपरेशन कराने पर मेरी कंपनी पैसा नहीं देती। नतीज़ा यह हुआ कि प्रत्येक आंख के लिए जो ऑपरेशन 35-40 हजार में होना था, उसका खर्च एक लाख से ऊपर आया।

मैं यह बात जिस कारण से कर रहा हूँ, वह ये है कि गोआ आने के बाद मैंने यहाँ के एक अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया, मुझे लगा कि यहाँ के चिकित्सक के पास मरीज़ की बातें ध्यान से सुनने के लिए समय था, यहाँ जो टेस्ट उन्होंने कराए वे महंगे भी नहीं थे और प्रासंगिक भी लगे और मुझे लगा कि उनके माध्यम से चिकित्सक महोदय सही निष्कर्ष पर पहुंच पाए।

अब यह भी है कि नई जगह पर शुरू में सब कुछ अच्छा लगता है, लेकिन यहाँ पर वह मैट्रो नहीं है, बाहर जाने के लिए उस तरह के साधन नहीं हैं, हालांकि जाने के लिए ‘बीच’ बहुत सारी हैं, जहाँ दुनिया भर से लोग आते हैं, लेकिन अगर आप स्वयं वाहन नहीं चलाते हैं तो ऑटो-टैक्सी आदि मिलना वैसे तो रिहायशी इलाकों में मुश्किल है और फिर मिलने पर वह कितना पैसा मांग ले, इसकी कोई सीमा नहीं है।

खैर आज स्वास्थ्य, उसके लिए सोशल मीडिया पर मिलने वाले नुस्खों और स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में हल्की-फुल्की चर्चा करनी थी, सो मुझे लगता है, फिलहाल के लिए काफी हो गई।

अब शीर्षक के बारे में ज्यादा मत सोचिए, ओम प्रकाश आदित्य जी की एक कविता का शीर्षक था यह, सो मैंने भी ‘टीप’ लिया।

नमस्कार।

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A short trip within Goa

I have been living in Goa for last more than a year. I never visited Goa before shifting here and after coming here I have rarely moved out for sight seeing.

Recently we had some guests and they visited various places in Goa for 3 days. I also joined them on the last day of their visit and we visited some places in south Goa. We started our journey via less crowded Benaulim fall, It is not big, since we have already seen  big natural falls in hill stations, Jabalpur’s Bheda Ghat, several in Kerala, also seen one in Scotland  and also one in man made big rock garden in Chandigarh.

But being big, is not really a big thing, It is a lovely piece of nature and we enjoyed being there. Nature attracts us in all forms and scales.

Goa is known for its beaches, our guests had already seen some famous beaches, this day we first went to the Utorda beach, it is not crowded but very beautiful. We really enjoyed visiting this lovely beach.

From Utorda beach we moved to Colva beach, which is much known and attracts much more tourists. Here we found a lot of people enjoying. Sea beaches really are great boon of nature and give great satisfaction to visitors, even grown ups play there like children. Really before the big power, his manifestations in the form of mountains, sea etc. everybody is a little child.

However after Colva beach we felt that we should also visit some place other than beaches, for which Goa  is famous in the world.

We were told that there is ‘Big Foot Museum’ on the way, near Madgaon, which gives a good reflection on the art and culture of Goa. We went there and I would like to say that we found it an excellent presentation on the life, art and culture of Goa.

This mini village was ambitiously planned by Maendra Jocelino Araujo Alvares and it unfolds the minute details of the Goan village.  It is well depicted   through life-size statues on display portraying the charm and simple livelihood of people of olden days.

I would recommend that while visiting the sea-beaches etc. one should also include this lovely place in the  list of places for visiting. Among the main attractions  there is a big statute of Mira Bai,  made in single stone. There are life size human structures which appear to be real people, really great pieces of work.

That was all for the day for us adults, however children accompanying us also visited a small fish aquarium for a while.

With this I conclude my blog post for today, which is a part of my submissions under #MyFriendAlexa campaign, through which I  wish to take my blog to next level.