अपना ख़ुदा ढूंढ रहे हैं!

पूजा में, नमाज़ों में, अज़ानों में, भजन में,
ये लोग कहाँ अपना ख़ुदा ढूंढ रहे हैं|

राजेश रेड्डी

दवा हो जाएगा!

मैं ख़ुदा का नाम लेकर पी रहा हूँ दोस्तो,
ज़हर भी इसमें अगर होगा, दवा हो जाएगा|

बशीर बद्र

अब ख़ुदा ही नहीं!

कैसे अवतार कैसे पैग़म्बर
ऐसा लगता है अब ख़ुदा ही नहीं।

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

आदमी का ख़्वाब सही!

ख़ुदा नहीं न सही, आदमी का ख़्वाब सही,
कोई हसीन नज़ारा तो है नज़र के लिए|

दुष्यंत कुमार

फिर ज़मीं पर कहीं–

जब हक़ीक़त है के हर ज़र्रे में तू रहता है,
फिर ज़मीं पर कहीं मस्जिद कहीं मंदिर क्यूँ है|

सुदर्शन फाक़िर

फिर चाहे दीवाना कर दे!

दर्द से मेरा दामन भर दे या अल्लाह,
फिर चाहे दीवाना कर दे या अल्लाह|

क़तील शिफ़ाई

ख़ुदा को भुला दें!

अगर ख़ुद को भूले तो, कुछ भी न भूले,
कि चाहत में उनकी, ख़ुदा को भुला दें|

सुदर्शन फ़ाकिर

उतनी दूर पिया तुम मेरे गाँव से!

हर पुरवा का झोंका तेरा घुँघरू,
हर बादल की रिमझिम तेरी भावना,,
हर सावन की बूंद तुम्हारी ही व्यथा
हर कोयल की कूक तुम्हारी कल्पना|

जितनी दूर ख़ुशी हर ग़म से,
जितनी दूर साज सरगम से,
जितनी दूर पात पतझर का छाँव से,
उतनी दूर पिया तुम मेरे गाँव से|

कुंवर बेचैन

मिट्टी है, हवा है मुझमें!

आग है, पानी है, मिट्टी है, हवा है मुझमें,
मुझको ये वहम नहीं है कि खु़दा है मुझमें|

राजेश रेड्डी

पत्थर भी है खुदा भी है!

मैं पूजता हूँ जिसे, उससे बेनियाज़ भी हूँ,
मेरी नज़र में वो पत्थर भी है खुदा भी है|

राहत इन्दौरी