दस्तक देने ये कौन आया है!

दिल पर दस्तक देने ये कौन आया है,
किसकी आहट सुनता है वीराने में।

गुलज़ार

कितनी देर लगा दी आने में!

शाम के साये बालिस्तों से नापे हैं,
चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में|

गुलज़ार

किसका ज़िक्र है इस अफ़साने में!

जाने किसका ज़िक्र है इस अफ़साने में,
दर्द मज़े लेता है जो दुहराने में|

गुलज़ार

पुराना खत खोला अनजाने में!

खुशबू जैसे लोग मिले अफ़साने में,
एक पुराना खत खोला अनजाने में|

गुलज़ार

हमीं ने शाम चुनी है!

सहर भी, रात भी, दोपहर भी मिली लेकिन,
हमीं ने शाम चुनी है, नहीं उदास नहीं|

गुलज़ार