न कहकर वो मुकर जाए तो कहना!

बहुत ख़ुश हो कि उसने कुछ कहा है,
न कहकर वो मुकर जाए तो कहना|

जावेद अख़्तर

अम्न-ओ-अमान बाक़ी है!

अब वो दुनिया अजीब लगती है,
जिसमें अम्न-ओ-अमान बाक़ी है|

राजेश रेड्डी

ख़ुशी से कोई मर भी नहीं जाता!

पागल हुए जाते हो ‘फ़राज़’ उससे मिले क्या,
इतनी सी ख़ुशी से कोई मर भी नहीं जाता|

अहमद फ़राज़

मगर आँसू निकल पड़े!

मुद्दत के बा’द उसने जो की लुत्फ़ की निगाह,
जी ख़ुश तो हो गया मगर आँसू निकल पड़े|

कैफ़ी आज़मी

हज़ार रंग में डूबी हुई हवा क्यूँ है!

अगर तबस्सुम-ए-ग़ुंचा की बात उड़ी थी यूँही,
हज़ार रंग में डूबी हुई हवा क्यूँ है|

राही मासूम रज़ा

मेरे घर का रुख़ भी कर लेती!

कभी ऐ ख़ुश-नसीबी मेरे घर का रुख़ भी कर लेती,
इधर पहुँची, उधर पहुँची, यहाँ आई, वहाँ आई|

मुनव्वर राना

मज़ारों पे चादर चढ़ाई हुई!

ख़ुशी हम ग़रीबों की क्या है मियाँ,
मज़ारों पे चादर चढ़ाई हुई |

बशीर बद्र

कहीं मेहरबां बेहिसाब है!

कहीं खो दिया कहीं पा लिया, कहीं रो लिया कहीं गा लिया,
कहीं छीन लेती है हर ख़ुशी, कहीं मेहरबां बेहिसाब है|

राजेश रेड्डी

फिर भी मुस्कुराती है!

हमें ऐ ज़िन्दगी तुझ पर हमेशा रश्क आता है,
मसायल से घिरी रहती है फिर भी मुस्कुराती है|

मुनव्वर राना