हरी कलगी बाजरे की – अज्ञेय

आज हिंदी साहित्य में प्रयोगवाद के प्रणेता और नई कविता के सूत्रधार स्व. सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। इस कविता में भी उन्होंने इस बात पर बल दिया है कि अब कविता में नए प्रतीकों की खोज की जानी चाहिए क्योंकि पुराने प्रतीकों का उपयोग होते-होते वे घिस … Read more

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