लाश चटानों में दबा दी जाए!

दिल का वो हाल हुआ है ग़म-ए-दौराँ के तले,
जैसे इक लाश चटानों में दबा दी जाए|

जाँ निसार अख़्तर

प्यार तुझ पर आ गया है!

शिकायत तेरी दिल से करते करते,
अचानक प्यार तुझ पर आ गया है|

फ़िराक़ गोरखपुरी

बात बदल बदल गई!

दिल से तो हर मोआ’मला करके चले थे साफ़ हम,
कहने में उनके सामने बात बदल बदल गई|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दीवार सी गिरी है अभी!

शोर बरपा है ख़ाना-ए-दिल में,
कोई दीवार सी गिरी है अभी|

नासिर काज़मी

दिल बोने की कोशिश की!

एक धुएँ का मर्ग़ोला सा निकला है,
मिट्टी में जब दिल बोने की कोशिश की|

गुलज़ार

कोई मरहम हो कोई निश्तर हो!

ये दिल है कि जलते सीने में इक दर्द का फोड़ा अल्लहड़ सा,
ना गुप्त रहे ना फूट बहे कोई मरहम हो कोई निश्तर हो|

इब्न ए इंशा

अब आन मिलो तो बेहतर हो!

दिल हिज्र के दर्द से बोझल है अब आन मिलो तो बेहतर हो,
इस बात से हमको क्या मतलब ये कैसे हो, ये क्यूँकर हो|

इब्न ए इंशा

जो कहते हैं उनको कहने दो!

या दिल की सुनो दुनिया वालो या मुझ को अभी चुप रहने दो,
मैं ग़म को ख़ुशी कैसे कह दूँ जो कहते हैं उनको कहने दो|

कैफ़ी आज़मी

उसकी पशेमानी मुझे दे दो!

वो दिल जो मैंने माँगा था मगर ग़ैरों ने पाया है,
बड़ी शय है अगर उसकी पशेमानी मुझे दे दो|

अब तो हैं परछाइयाँ तिरी!

दिल के उफ़क़ तक अब तो हैं परछाइयाँ तिरी,
ले जाए अब तो देख ये वहशत कहाँ कहाँ|

फ़िराक़ गोरखपुरी