बैठ के अपने यारों में!

सब का दिल हो अपने जैसा अनहोनी सी बात लगे,
’नक़्श’ यह क्या सोचा करते हो बैठ के अपने यारों में।

नक़्श लायलपुरी

दस्तक देने ये कौन आया है!

दिल पर दस्तक देने ये कौन आया है,
किसकी आहट सुनता है वीराने में।

गुलज़ार

कहीं, आँसुओं से लिखा हुआ!

जिसे ले गई अभी हवा, वे वरक़ था दिल की किताब का,
कही आँसुओं से मिटा हुआ, कहीं, आँसुओं से लिखा हुआ।

बशीर बद्र

उस झोली को फैलाना क्या!

इस दिल के दरीदा दामन को देखो तो सही सोचो तो सही।
जिस झोली में सौ छेद हुए उस झोली को फैलाना क्या॥

इब्ने इंशा

जिसे पास बुलाया भी नहीं!

रोज़ आता है दर-ए-दिल पे वो दस्तक देने,
आज तक हमने जिसे पास बुलाया भी नहीं|

क़तील शिफ़ाई

जिसका कोई साया भी नहीं!

प्यास वो दिल की बुझाने कभी आया भी नहीं,
कैसा बादल है जिसका कोई साया भी नहीं|

क़तील शिफ़ाई

पागल दिल का मचलना जारी है!

जाने कितनी बार ये टूटा, जाने कितनी बार लुटा,
फिर भी सीने में इस पागल दिल का मचलना जारी है|

राजेश रेड्डी

इन्हें निकाल के चल!

अगर ये पाँव में होते तो चल भी सकता था,
ये शूल दिल में चुभे हैं इन्हें निकाल के चल।

कुँअर बेचैन

दुकानें खुलीं, कारख़ाने लगे!

कभी बस्तियाँ दिल की यूँ भी बसीं,
दुकानें खुलीं, कारख़ाने लगे|

बशीर बद्र

इस पे दिलों को तौले कौन!

सब डरते हैं, आज हवस के इस सहरा में बोले कौन,
इश्क तराजू तो है, लेकिन, इस पे दिलों को तौले कौन|

राही मासूम रज़ा