जैसे नाम तुम्हारा दिन!

आज मैं एक बार फिर सूर्यभानु गुप्त जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| वैसे तो ग़ज़ल लिखने वाले बहुत सारे हैं, लेकिन कुछ होते हैं जो अपने अलग किस्म के मुहावरे, अभिव्यक्ति के सौन्दर्य के कारण पहचाने जाते हैं, सूर्यभानु गुप्त जी भी उनमें शामिल हैं| उनके कुछ शेर जो मुझे अक्सर याद … Read more

सिर्फ अंगूठे हैं हम लोग!

आज किसी ब्लॉग पोस्ट में ही शेरजंग गर्ग जी का उल्लेख देखा तो सोचा कि उनकी ही रचना आज शेयर की जाए| बहुत पहले जब मैं दिल्ली में रहता था (1980 तक) तब कुछ कवि गोष्ठियों में उनका रचना पाठ सुनने का मौका मिला था, श्रेष्ठ रचनाकार हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री शेरजंग गर्ग … Read more

संसद से राजघाट तक फैले हुए हैं आप!

श्री कुबेर दत्त जी मेरे मित्र रहे थे जब वे संघर्ष कर रहे थे, दूरदर्शन में स्थापित होने से पहले| अत्यंत भावुकतापूर्ण गीत लिखा करते थे, अखबारों में छपने के लिए परिचर्चाएँ किया करते थे| एक परिचर्चा का शीर्षक मुझे अभी तक याद है- ‘ज़िंदगी है क़ैद पिंजरों में’ जिसमें उन्होंने मुझे भी शामिल किया … Read more

सपने ताजमहल के हैं!

आज मैं हिन्दी बहुत प्यारे कवि/ गीतकार स्वर्गीय बाल स्वरूप राही जी की एक गजल प्रस्तुत कर रहा हूँ| राही जी ने बहुत अच्छे गीत और गज़लें हमें दी हैं| आज की ये गजल भी आशा है आपको पसंद आएगी-     उनके वादे कल के हैं, हम मेहमाँ दो पल के हैं ।   … Read more

%d bloggers like this: