Categories
Uncategorized

संसद से राजघाट तक फैले हुए हैं आप!

श्री कुबेर दत्त जी मेरे मित्र रहे थे जब वे संघर्ष कर रहे थे, दूरदर्शन में स्थापित होने से पहले| अत्यंत भावुकतापूर्ण गीत लिखा करते थे, अखबारों में छपने के लिए परिचर्चाएँ किया करते थे| एक परिचर्चा का शीर्षक मुझे अभी तक याद है- ‘ज़िंदगी है क़ैद पिंजरों में’ जिसमें उन्होंने मुझे भी शामिल किया था| मैंने उनके लिखे बहुत से पोस्टकार्ड काफी समय तक सँभालकर रखे, जिनमें वे लिखते थे कि वे मुझसे बहुत देर बात करना चाहते हैं|

 

 

 

बाद में दूरदर्शन में स्थापित होने के बाद तो बड़े-बड़े लोग उनके भक्त हो गए और उन्होंने अपने शुरू के गीतों को पलायन की निशानी मान लिया| मैंने अपनी शुरू की ब्लॉग पोस्ट्स में उनके कुछ गीत शेयर किए हैं| जैसे एक था-

 

‘ऐसी है अगवानी, चितकबरे मौसम की,
सुबह-शाम करते हैं झूठ को हजम,
सही गलत रिश्तों में बंधे हुए हम’

 

खैर आज उनकी लिखी एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ-

 

महलों से मुर्दघाट तक फैले हुए हैं आप,
मखमल से लेके टाट तक फैले हुए हैं आप|

 

बिजनेस बड़ा है आपका तारीफ़ क्या करें,
मन्दिर से लेके हाट तक फैले हुए हैं आप|

 

सोना बिछाना ओढ़ना सब ख़्वाब हो गए,
डनलप पिलो से खाट तक फैले हुए हैं आप|

 

ईमान तुल रहा है यहाँ कौडि़यों के मोल,
भाषण से लेके बाट तक फैले हुए हैं आप|

 

दरबारियों की भीड़ में जम्हूरियत का रक़्स,
आमद से लेके थाट तक फैले हुए हैं आप|

 

जनता का शोर ख़ूब है जनता कहीं नहीं,
संसद से राजघाट तक फैले हुए हैं आप|

 

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|

******

Categories
Uncategorized

सपने ताजमहल के हैं!

आज मैं हिन्दी बहुत प्यारे कवि/ गीतकार स्वर्गीय बाल स्वरूप राही जी की एक गजल प्रस्तुत कर रहा हूँ| राही जी ने बहुत अच्छे गीत और गज़लें हमें दी हैं| आज की ये गजल भी आशा है आपको पसंद आएगी-

 

 

उनके वादे कल के हैं,
हम मेहमाँ दो पल के हैं ।

 

कहने को दो पलकें हैं,
कितने सागर छलके हैं ।

 

मदिरालय की मेज़ों पर,
सौदे गंगा जल के हैं ।

 

नई सुबह के क्या कहने,
ठेकेदार धुँधलके हैं ।

 

जो आधे में छूटी हम,
मिसरे उसी ग़ज़ल के हैं ।

 

बिछे पाँव में क़िस्मत है,
टुकड़े तो मखमल के हैं ।

 

रेत भरी है आँखों में,
सपने ताजमहल के हैं ।

 

क्या दिमाग़ का हाल कहें,
सब आसार खलल के हैं ।

 

सुने आपकी राही कौन,
आप भला किस दल के हैं ।

 

आज के लिए इतना ही|
नमस्कार|

******