ढूँढता फिरता है मुझे घर मेरा!

किससे पूछूँ कि कहाँ गुम हूँ कई बरसों से,
हर जगह ढूँढता फिरता है मुझे घर मेरा|

निदा फ़ाज़ली

मुझको अपना घर अच्छा लगा!

हर तरह की बे-सर-ओ-सामानियों के बावजूद,
आज वो आया तो मुझको अपना घर अच्छा लगा|

अहमद फ़राज़

अच्छा सा मकीं ढूँढना था!

पहले तामीर हमें करना था अच्छा सा मकाँ,
फिर मकाँ के लिए अच्छा सा मकीं ढूँढना था|

राजेश रेड्डी

आग लगी हो तो अपने घर में रहो!

जला न लो कहीं हमदर्दियों में अपना वजूद,
गली में आग लगी हो तो अपने घर में रहो|

राहत इन्दौरी

मिरा घर तो है दरवाज़ा नहीं!

कोई भी दस्तक करे आहट हो या आवाज़ दे,
मेरे हाथों में मिरा घर तो है दरवाज़ा नहीं|

वसीम बरेलवी

फिर घर तलाश कर!

रहता नहीं है कुछ भी यहाँ एक सा सदा,
दरवाज़ा घर का खोल के फिर घर तलाश कर|

निदा फ़ाज़ली

घर में हूँ या मैं किसी मज़ार में हूँ!

मकाँ है क़ब्र जिसे लोग ख़ुद बनाते हैं,
मैं अपने घर में हूँ या मैं किसी मज़ार में हूँ|

मुनीर नियाज़ी

वर्ना घर खो जाएँगे!

तुम जो सोचो वो तुम जानो हम तो अपनी कहते हैं,
देर न करना घर आने में वर्ना घर खो जाएँगे|

निदा फ़ाज़ली

घर-बार होना चाहिए!

ज़िंदगी तू कब तलक दर-दर फिराएगी हमें,
टूटा-फूटा ही सही घर-बार होना चाहिए|

मुनव्वर राना

मेरे हिस्से में माँ आई!

किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई,
मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई |

मुनव्वर राना