प्यार से भीगा प्रकृति का गात साथी!

स्वर्गीय भारत भूषण जी मेरे परम प्रिय कवि रहे हैं, कवि सम्मेलनों में उनका कविता पाठ सुनना, वास्तव में वहाँ जाने की क्रिया को सार्थक कर देता था| बहुत भाव-विभोर होकर वे सस्वर काव्य-पाठ करते थे|



आज का भारत भूषण जी का यह गीत दर्शाता है कि किस प्रकार पूरे संयम और मर्यादा के साथ, सार्थक प्रणय गीत लिखा जा सकता है-

आज पहली बात पहली रात साथी|

चाँदनी ओढ़े धरा सोई हुई है,
श्याम अलकों में किरण खोई हुई है|
प्यार से भीगा प्रकृति का गात साथी,
आज पहली बात पहली रात साथी|

मौन सर में कंज की आँखें मुंदी हैं,
गोद में प्रिय भृंग हैं बाहें बँधी हैं,
दूर है सूरज, सुदूर प्रभात साथी,
आज पहली बात पहली रात साथी|

आज तुम भी लाज के बंधन मिटाओ,
खुद किसी के हो चलो अपना बनाओ,
है यही जीवन, नहीं अपघात साथी|
आज पहली बात पहली रात साथी|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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