धूप ने तलवे जलाए हैं क्या क्या!

छटा जहाँ से उस आवाज़ का घना बादल,
वहीं से धूप ने तलवे जलाए हैं क्या क्या|

कैफ़ी आज़मी

कहीं ग़म की आग घुला न दे!

मिरे साथ चलने के शौक़ में बड़ी धूप सर पे उठाएगा,
तिरा नाक नक़्शा है मोम का कहीं ग़म की आग घुला न दे|

बशीर बद्र

धूप से नफ़रत उसे भी थी!

तन्हा हुआ सफ़र में तो मुझ पे खुला ये भेद,
साए से प्यार धूप से नफ़रत उसे भी थी|

मोहसिन नक़वी

याद के साये हैं पनाहों की तरह!

हर तरफ़ ज़ीस्त की राहों में कड़ी धूप है दोस्त,
बस तेरी याद के साये हैं पनाहों की तरह|

सुदर्शन फ़ाकिर

ठंडी छाँव में याद आई उसकी धूप!

ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उसकी धूप,
क़द्र-ए-वतन हुई हमें तर्क-ए-वतन के बा’द|

कैफ़ी आज़मी

मेरे नाम का बादल भेजो न!

धूप बहुत है मौसम जल-थल भेजो न,
बाबा मेरे नाम का बादल भेजो न|

राहत इन्दौरी

फिर भी उधर जाता हूँ मैं!

जानता हूँ रेत पर वो चिलचिलाती धूप है,
जाने किस उम्मीद में फिर भी उधर जाता हूँ मैं|

राजेश रेड्डी