लापता अंगनाइयां हैं!

नई तहज़ीब ने ये गुल खिलाए,
घरों से लापता अंगनाइयां हैं|

सूर्यभानु गुप्त

चिराग़ाँ हर एक घर के लिए!

कहां तो तय था चिराग़ाँ हर एक घर के लिए,
कहां चिराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए|

दुष्यंत कुमार

युद्ध – 2

बम घरों पर गिरे कि सरहद पर ,
रूह-ऐ-तामीर जख्म खाती है !
खेत अपने जले कि औरों के ,
जीस्त फ़ाकों से तिलमिलाती है !

साहिर लुधियानवी