नीड़ का निर्माण फिर फिर!

आज एक बार फिर से हिन्दी गीत काव्य के स्तंभ और कवि सम्मेलनों में श्रोताओं को झूमने के लिए मजबूर कर देने वाले विख्यात कवि और गीतकार स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी का एक प्रसिद्ध गीत शेयर कर रहा हूँ| बच्चन जी के बारे में कुछ बातें मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ, इस … Read more

मैं सांसों के दो तार लिए फिरता हूँ!

आज एक बार फिर से मैं हिन्दी काव्य जगत के अनूठे कवि, किसी समय मंचों की शोभा बढ़ाने वाले और श्रोताओं को झूमने के लिए मजबूर करने वाले, स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिसे उन्होंने आत्म-परिचय के रूप में प्रस्तुत किया है| एक बार फिर से मुझे आकाशवाणी … Read more

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