कोई गले लगाए मुझे!

मैं चाहता हूँ कि तुम ही मुझे इजाज़त दो,
तुम्हारी तरह से कोई गले लगाए मुझे|

बशीर बद्र

ज़रा फ़ासले से मिला करो!

कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से,
ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से मिला करो|

बशीर बद्र

दिखावे की दोस्ती न मिला!

मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला,
अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला|

बशीर बद्र

खुल के मिलने का सलीक़ा!

खुल के मिलने का सलीक़ा आपको आता नहीं,
और मेरे पास कोई चोर दरवाज़ा नहीं|

वसीम बरेलवी

ये नये मिज़ाज का शहर है!

कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से,
ये नये मिज़ाज का शहर है, ज़रा फ़ासले से मिला करो|

बशीर बद्र

नज़रें भी चुरा लेते हैं लोग!

मिल भी लेते हैं गले से अपने मतलब के लिए,
आ पड़े मुश्किल तो नज़रें भी चुरा लेते हैं लोग|

क़तील शिफ़ाई

जोड़ दूंगा उसे!

कहीं अकेले में मिलकर झिंझोड़ दूँगा उसे,
जहां जहां से वो टूटा है जोड़ दूंगा उसे|

राहत इन्दौरी

जो मुस्कुरा के हमेशा गले लगाये मुझे!

वही तो सबसे ज़ियादा है नुक्ता-चीं मेरा,
जो मुस्कुरा के हमेशा गले लगाये मुझे।

क़तील शिफ़ाई