फ़र्ज़ करो बस यही हक़ीक़त!

फ़र्ज़ करो ये जोग बिजोग का हमने ढोंग रचाया हो,
फ़र्ज़ करो बस यही हक़ीक़त बाक़ी सब कुछ माया हो|

इब्ने इंशा

फ़र्ज़ करो ये रोग हो झूठा!

फ़र्ज़ करो ये रोग हो झूठा, झूठी प्रीत हमारी हो,
फ़र्ज़ करो इस प्रीत के रोग में सांस भी हम पर भारी हो|

इब्ने इंशा

नैन तुम्हारे सचमुच के मयख़ाने हों!

फ़र्ज़ करो तुम्हें ख़ुश करने के ढूंढे हमने बहाने हों,
फ़र्ज़ करो ये नैन तुम्हारे सचमुच के मयख़ाने हों|

इब्ने इंशा

फ़र्ज़ करो ये जी की बिपदा!

फ़र्ज़ करो ये जी की बिपदा, जी से जोड़ सुनाई हो,
फ़र्ज़ करो अभी और हो इतनी, आधी हमने छुपाई हो|

इब्ने इंशा

फ़र्ज़ करो हम अहले वफ़ा हों!

फ़र्ज़ करो हम अहले वफ़ा हों, फ़र्ज़ करो दीवाने हों,
फ़र्ज़ करो ये दोनों बातें झूठी हों अफ़साने हों|

इब्ने इंशा

हमें हाँ याद रहेगा!

हम भूल सकें हैं न तुझे भूल सकेंगे,
तू याद रहेगा हमें हाँ याद रहेगा|

इब्ने इंशा

जिनमें बयाँ याद रहेगा!

कुछ मीर के अबियत थे, कुछ फ़ैज़ के मिसरे,
एक दर्द का था जिनमें बयाँ याद रहेगा|

इब्ने इंशा

वो दर्द कि उठा था यहाँ!

वो टीस कि उभरी थी इधर याद रहेगा,
वो दर्द कि उठा था यहाँ याद रहेगा|

इब्ने इंशा

रुख़सत का समां याद रहेगा!

उस शाम वो रुख़सत का समां याद रहेगा,
वो शहर, वो कूचा, वो मकाँ याद रहेगा|

इब्ने इंशा

और करे दीवाना क्या!

जब शहर के लोग न रस्ता दें क्यूं बन में न जा बिसराम करें।
दीवानों की सी न बात करे तो और करे दीवाना क्या॥

इब्ने इंशा