घूँट को कड़वा किया न जाए!

हर वक़्त हमसे पूछ न ग़म रोज़गार के,
हम से हर घूँट को कड़वा किया न जाए|

जाँ निसार अख़्तर

सिफारिशों को इकट्ठा किया न जाए!

ईनाम हो, ख़िताब हो, वैसे मिले कहाँ,
जब तक सिफारिशों को इकट्ठा किया न जाए|

जाँ निसार अख़्तर

इस तरह का तमाशा किया न जाए!

लहजा बना के बात करें उनके सामने,
हमसे तो इस तरह का तमाशा किया न जाए|

जाँ निसार अख़्तर

किसी पे भरोसा किया न जाए!

हर-चंद एतिबार में धोखे भी है मगर,
ये तो नहीं किसी पे भरोसा किया न जाए|

जाँ निसार अख़्तर

हर बात पे झगड़ा किया न जाए!

उनकी रविश जुदा है हमारी रविश जुदा,
हमसे तो हर बात पे झगड़ा किया न जाए|

जाँ निसार अख़्तर

सूना किया न जाए!

उठने को उठ तो जाएँ तेरी अंजुमन से हम,
पर तेरी अंजुमन को भी सूना किया न जाए|

जाँ निसार अख़्तर

अपने-आप को तन्हा किया न जाए!

हम हैं तेरा ख़याल है तेरा जमाल है,
इक पल भी अपने-आप को तन्हा किया न जाए|

जाँ निसार अख़्तर

आपको रुसवा किया न जाए!

अच्छा है उनसे कोई तक़ाज़ा किया न जाए,
अपनी नज़र में आपको रुसवा किया न जाए|

जाँ निसार अख़्तर

सुनहरा दिखाई पड़ता है!

चमकती रेत पर ये ग़ुस्ल-ए-आफ़ताब तेरा,
बदन तमाम सुनहरा दिखाई पड़ता है|

जाँ निसार अख़्तर

अधूरा दिखाई पड़ता है!

न कोई ख़्वाब न कोई ख़लिश न कोई ख़ुमार,
ये आदमी तो अधूरा दिखाई पड़ता है|

जाँ निसार अख़्तर