ये इल्म का सौदा!

ये इल्म का सौदा ये रिसाले ये किताबें
इक शख़्स की यादों को भुलाने के लिए हैं|

जां निसार अख़्तर

मंदिर में दीप !

देखूँ तेरे हाथों को तो लगता है तेरे हाथ
मंदिर में फ़क़त दीप जलाने के लिए हैं|

जां निसार अख़्तर

ख़्वाब!

आँखों में जो भर लोगे तो काँटों से चुभेंगे
ये ख़्वाब तो पलकों पे सजाने के लिए हैं|

जां निसार अख़्तर