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खामोशी पहचाने कौन!

एक बार फिर से आज मैं अपने अत्यंत प्रिय शायरों में से एक, स्वर्गीय निदा फ़ाज़ली साहब का लिखा एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे जगजीत सिंह-चित्रा सिंह की सुरीली जोड़ी ने बहुत खूबसूरत अंदाज में गाया है|

निदा फ़ाज़ली साहब ने कुछ बेमिसाल गीत, ग़ज़लें और दोहे लिखे हैं और यह भी उनमें शामिल है| इंसानी भावनाओं को बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति निदा साहब की रचनाओं में मिलती है|

लीजिए आज प्रस्तुत है, निदा फ़ाज़ली साहब का यह सुंदर गीत –

मुँह की बात सुने हर कोई
दिल के दर्द को जाने कौन,
आवाज़ों के बाज़ारों में
ख़ामोशी पहचाने कौन।

सदियों-सदियों वही तमाशा
रस्ता-रस्ता लम्बी खोज
लेकिन जब हम मिल जाते हैं
खो जाता है जाने कौन।


जाने क्या-क्या बोल रहा था
सरहद, प्यार, किताबें, ख़ून
कल मेरी नींदों में छुपकर
जाग रहा था जाने कौन।

मैं उसकी परछाई हूँ या
वो मेरा आईना है
मेरे ही घर में रहता है
मेरे जैसा जाने कौन।


किरन-किरन अलसाता सूरज
पलक-पलक खुलती नींदें
धीमे-धीमे बिखर रहा है
ज़र्रा-ज़र्रा जाने कौन।

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार

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एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम!

आज ज़नाब क़तील शिफ़ाई साहब की एक ग़ज़ल के कुछ शेर शेयर कर रहा हूँ| क़तील साहब भारतीय उपमहाद्वीप के जाने-माने शायर रहे हैं और उनकी ग़ज़लें ग़ुलाम अली साहब और जगजीत सिंह जी जैसे प्रमुख ग़ज़ल गायकों ने गाई हैं|

लीजिए आज क़तील शिफ़ाई साहब की इस ग़ज़ल का आनंद लीजिए, जिसे जगजीत सिंह-चित्रा सिंह की सुरीली जोड़ी गाया है –


मिलकर जुदा हुए तो न सोया करेंगे हम,
एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम|

आँसू छलक छलक के सतायेंगे रात भर,
मोती पलक पलक में पिरोया करेंगे हम|

जब दूरियों की आग दिलों को जलायेगी,
जिस्मों को चाँदनी में भिगोया करेंगे हम|

गर दे गया दग़ा हमें तूफ़ान भी “क़तील”,
साहिल पे कश्तियों को डूबोया करेंगे हम|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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