खामोशी पहचाने कौन 5

किरन-किरन अलसाता सूरजपलक-पलक खुलती नींदेंधीमे-धीमे बिखर रहा हैज़र्रा-ज़र्रा जाने कौन । निदा फाज़ली

खामोशी पहचाने कौन 3

जाने क्या-क्या बोल रहा थासरहद, प्यार, किताबें, ख़ूनकल मेरी नींदों में छुपकरजाग रहा था जाने कौन । निदा फाज़ली

ख़ामोशी पहचाने कौन 1

मुँह की बात सुने हर कोईदिल के दर्द को जाने कौनआवाज़ों के बाज़ारों मेंख़ामोशी पहचाने कौन । निदा फाज़ली

फिर नशे में 4

मुझको कदम कदम पे भटकने दो वाइजोंतुम अपना कारोबार करो मैं नशे में हूँ| फिर बेख़ुदी में हद से गुजरने लगा हूँ मैंइतना न मुझ से प्यार करो मैं नशे में हूँ| शाहिद कबीर

अब तुझे मैं याद आना चाहता हूँ !

एक बार फिर से आज जनाब क़तील शिफ़ाई साहब की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| क़तील साहब भारतीय के एक अत्यंत लोकप्रिय शायर रहे हैं| उनकी इस ग़ज़ल को जगजीत सिंह जी ने भी गाया है| कवि/शायरों की कैसी-कैसी ख्वाहिशें होती हैं, जैसे इस ग़ज़ल में ही क़तील साहब ने कुछ बेहतरीन ख़्वाहिशों का … Read more

मैं जहां भी जाऊंगा, उसको पता हो जाएगा !!

आज डॉक्टर बशीर बद्र साहब की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ, जिसे जगजीत सिंह और अन्य गायक कलाकारों ने भी गाया है| बद्र साहब अपनी नायाब एक्स्प्रेशन और भाषिक प्रयोगों के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है डॉक्टर बशीर बद्र साहब की ये बेहतरीन ग़ज़ल- सर झुकाओगे तो पत्थर … Read more

अपनी रात की छत पर, कितना तन्हा होगा चांद!

प्रसिद्ध लेखक, उपन्यासकार, पटकथा लेखक और गीतकार स्वर्गीय डॉक्टर राही मासूम रज़ा साहब की एक प्रसिद्ध ग़ज़ल मैं आज शेयर कर रहा हूँ| उनके उपन्यास – आधा गाँव, दिल एक सादा कागज, टोपी शुक्ला, मैं एक फेरीवाला आदि बहुत प्रसिद्ध हुए थे और बड़ी भावुकता और राजनीति पर पैनी दृष्टि के साथ उन्होंने ये उपन्यास … Read more

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