आँसू मेरे दामन पे बिखर जाने दे!

आग दुनिया की लगाई हुई बुझ जाएगी,
कोई आँसू मेरे दामन पे बिखर जाने दे।

नज़ीर बाक़री

कोई ज़ख़्म तो भर जाने दे!

ऐ नये दोस्त मैं समझूँगा तुझे भी अपना,
पहले माज़ी का कोई ज़ख़्म तो भर जाने दे|

नज़ीर बाक़री

मुझे डूब के मर जाने दे!

अपनी आँखों के समंदर मैं उतर जाने दे,
तेरा मुजरिम हूँ मुझे डूब के मर जाने दे|


नज़ीर बाक़री

मैं एक कतरा हूँ–

मैं एक कतरा हूँ मेरा अलग वजूद तो है,
हुआ करे जो समंदर मेरी तलाश में है|

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

घर छोड़ के जाने वाला!

उसको रुखसत तो किया था मुझे मालूम न था,
सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला|

निदा फ़ाज़ली

संगीत अमर कर दो!

आकाश का सूनापन,
मेरे तनहा मन में|
पायल छनकाती तुम,
आजाओ जीवन में|
साँसें देकर अपनी,
संगीत अमर कर दो|
होंठों से छूलो तुम …

इंदीवर

जीत अमर कर दो!

जग ने छीना मुझसे,
मुझे जो भी लगा प्यारा|
सब जीता किये मुझसे,
मैं हर दम ही हारा|
तुम हार के दिल अपना,
मेरी जीत अमर कर दो|
होंठों से छूलो तुम …

इंदीवर

तो देखे केवल मन!

न उम्र की सीमा हो,
न जनम का हो बंधन|
जब प्यार करे कोई,
तो देखे केवल मन|
नई रीत चलाकर तुम,
ये रीत अमर कर दो|
होंठों से छूलो तुम …

इंदीवर