बारिश ही में ये रंग उतर जाते हैं!

नर्म अल्फ़ाज़ भली बातें मोहज़्ज़ब लहजे,
पहली बारिश ही में ये रंग उतर जाते हैं|

जावेद अख़्तर

दीवारों से टकरा के बिखर जाते हैं!

छत की कड़ियों से उतरते हैं मिरे ख़्वाब मगर,
मेरी दीवारों से टकरा के बिखर जाते हैं|

जावेद अख़्तर

कहें क्या कि किधर जाते हैं!

रास्ता रोके खड़ी है यही उलझन कब से,
कोई पूछे तो कहें क्या कि किधर जाते हैं|

जावेद अख़्तर

फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं!

दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं,
ज़ख़्म कैसे भी हों कुछ रोज़ में भर जाते हैं|

जावेद अख़्तर

न पूरे शहर पर छाए तो कहना!

धुआँ जो कुछ घरों से उठ रहा है,
न पूरे शहर पर छाए तो कहना|

जावेद अख़्तर

दिल ग़म से घबराए तो कहना!

बदल जाओगे तुम ग़म सुन के मेरे,
कभी दिल ग़म से घबराए तो कहना|

जावेद अख़्तर

न कहकर वो मुकर जाए तो कहना!

बहुत ख़ुश हो कि उसने कुछ कहा है,
न कहकर वो मुकर जाए तो कहना|

जावेद अख़्तर

समझ में जब ये आ जाए तो कहना!

ये गुल काग़ज़ हैं ये ज़ेवर हैं पीतल,
समझ में जब ये आ जाए तो कहना|

जावेद अख़्तर

दुनिया तुमको रास आए तो कहना!

ये दुनिया तुमको रास आए तो कहना,
न सर पत्थर से टकराए तो कहना|

जावेद अख़्तर

अंजाम की वो इब्तिदा थी!

मैं बचपन में खिलौने तोड़ता था,
मिरे अंजाम की वो इब्तिदा थी|

जावेद अख़्त