आहों का ज़माना है!

आग़ाज़-ए-मोहब्बत है आना है न जाना है,
अश्कों की हुकूमत है आहों का ज़माना है|

जिगर मुरादाबादी

ठोकर में ज़माना है!

क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है,
हम ख़ाक-नशीनों की ठोकर में ज़माना है|

जिगर मुरादाबादी

रूह को भी मज़ा मोहब्बत का!

रूह को भी मज़ा मोहब्बत का,
दिल की हम-साएगी से मिलता है|

जिगर मुरादाबादी

जब बे-ख़ुदी से मिलता है!

कारोबार-ए-जहाँ सँवरते हैं,
होश जब बे-ख़ुदी से मिलता है|

जिगर मुरादाबादी

दिल उसी से मिलता है!

मिल के भी जो कभी नहीं मिलता,
टूट कर दिल उसी से मिलता है|

जिगर मुरादाबादी

रंग तेरी हँसी से मिलता है!

आज क्या बात है कि फूलों का,
रंग तेरी हँसी से मिलता है|

जिगर मुरादाबादी

भूल जाता हूँ मैं सितम उसके!

भूल जाता हूँ मैं सितम उसके,
वो कुछ इस सादगी से मिलता है|

जिगर मुरादाबादी

आदमी आदमी से मिलता है!

आदमी आदमी से मिलता है,
दिल मगर कम किसी से मिलता है|

जिगर मुरादाबादी

अब दिल को ख़ुदा रक्खे!

ख़ुद्दारी-ओ-महरूमी, महरूमी-ओ-ख़ुद्दारी,
अब दिल को ख़ुदा रक्खे अब दिल का ज़माना है|

जिगर मुरादाबादी

लाज़िम उन्हें आना है!

मुझको इसी धुन में है हर लहज़ा बसर करना,
अब आए वो अब आए, लाज़िम उन्हें आना है|

जिगर मुरादाबादी